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हिमाचल प्रदेश में एंबुलेंस कर्मचारियों की 132 घंटे की हड़ताल, सेवाएं प्रभावित

हिमाचल प्रदेश में एंबुलेंस कर्मचारियों ने 132 घंटे की हड़ताल शुरू कर दी है, जिसके चलते 108 और 102 एंबुलेंस सेवाएं ठप हो गई हैं। कर्मचारियों की मांगों में न्यूनतम वेतन, ओवरटाइम का भुगतान, और अन्य अधिकार शामिल हैं। हड़ताल का प्रभाव विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा। यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
 

हड़ताल का कारण और प्रभाव


शिमला। हिमाचल प्रदेश में एंबुलेंस सेवाएं आज से कई स्थानों पर ठप हो गई हैं। 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन ने सीटू के बैनर तले 132 घंटे की राज्यव्यापी हड़ताल की शुरुआत की है, जो 11 अप्रैल सुबह 8 बजे तक जारी रहेगी। इस हड़ताल के कारण प्रदेश में एंबुलेंस सेवाएं पूरी तरह से बाधित होने की संभावना है।

राजधानी शिमला में एंबुलेंस कर्मचारियों ने राज्य सचिवालय के पास सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। ये कर्मचारी 5 दिनों तक यहां डेरा डालने का निर्णय लिया है। हालांकि, कांग्रेस से जुड़े कर्मचारी संगठन इस हड़ताल में शामिल नहीं हुए हैं। केवल ठेके पर काम करने वाले एंबुलेंस कर्मी ही इसमें भाग ले रहे हैं। सरकार ने हड़ताल के मद्देनजर वैकल्पिक व्यवस्था की है, लेकिन ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में आपातकालीन सेवाएं प्रभावित होंगी।

सीटू के प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने बताया कि लगभग 1300 एंबुलेंस कर्मी हड़ताल पर रहेंगे और 296 एंबुलेंस की सेवाएं ठप रहेंगी। सोमवार को सैकड़ों कर्मचारी हाथों में झंडे लेकर राज्य सचिवालय के बाहर पहुंचे और नारेबाजी की।

विजेंद्र मेहरा ने आरोप लगाया कि एंबुलेंस कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन नहीं मिल रहा है, उन्हें 12-12 घंटे काम करने के बावजूद ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जाता। स्वास्थ्य विभाग कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है और ट्रांसफर का दबाव भी बनाया जा रहा है। कई कर्मचारियों को महीनों तक ड्यूटी से बाहर रखा गया है, और ईपीएफ तथा ईएसआई में भी गड़बड़ी की जा रही है।

कर्मचारियों का कहना है कि वे नेशनल हेल्थ मिशन के तहत मेडस्वान फाउंडेशन में काम कर रहे हैं और वर्षों से शोषण का सामना कर रहे हैं। यूनियन का दावा है कि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय, लेबर कोर्ट और सीजेएम कोर्ट शिमला के आदेशों के बावजूद कर्मचारियों को राहत नहीं मिली है।

मुख्य मांगें हैं: सरकारी नियमों के अनुसार न्यूनतम वेतन लागू किया जाए, 12 घंटे की ड्यूटी पर डबल ओवरटाइम का भुगतान किया जाए, सभी छुट्टियों का प्रावधान किया जाए, गाड़ी मेंटेनेंस के दौरान वेतन न काटा जाए, ईपीएफ और ईएसआई में गड़बड़ी तुरंत सुधारी जाए, और यूनियन नेताओं का तबादला और प्रताड़ना बंद की जाए।

इस हड़ताल का प्रभाव आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी सभी मांगें पूरी नहीं हुईं और समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन निर्णायक चरण में जाएगा। मेहरा ने कहा कि 11 अप्रैल तक यहां धरना जारी रहेगा और यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन और तेज होगा.