हिंदू धर्म में स्त्रियों के भाग्य के प्रतीक अंग
स्त्रियों का सम्मान और भाग्य
हिंदू धर्म में यह मान्यता है कि जहां महिलाओं का सम्मान होता है, वहां देवी-देवताओं का वास होता है। स्त्री को लक्ष्मी देवी का अवतार माना जाता है, इसलिए किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में उनकी उपस्थिति अनिवार्य होती है। पुराणों में भाग्यशाली स्त्रियों का उल्लेख किया गया है। कुछ महिलाएं अपने जन्म से ही परिवार में खुशियों का संचार करती हैं, जबकि अन्य विवाह के बाद अपने पतियों की किस्मत बदल देती हैं।
गरुड़ पुराण, समुद्र पुराण और भविष्य पुराण में पुरुषों और महिलाओं के अंगों के बारे में विस्तार से बताया गया है कि कौन से अंग परिवार के लिए शुभ होते हैं। इन अंगों के माध्यम से हम व्यक्ति के वर्तमान और भविष्य के बारे में जान सकते हैं।
अविवाहित लोगों के लिए यह जानना दिलचस्प होता है कि उनका जीवन साथी कैसा होगा। इस जिज्ञासा को शांत करने के लिए कुंडली का अध्ययन किया जा सकता है।
भृगु संहिता के अनुसार, कुंडली का सप्तम भाव विवाह का कारक स्थान माना जाता है। विभिन्न लग्न के अनुसार इस भाव की राशि और स्वामी बदलते हैं।
लंबी गर्दन वाली स्त्रियां परिवार के लिए भाग्यशाली और धनवान मानी जाती हैं। इसी तरह, बड़े कान वाली महिलाएं भी भाग्यशाली होती हैं और लंबी उम्र जीने वाली मानी जाती हैं।
हिंदू धर्म में सभी देवियों के लंबे बाल होते हैं, इसलिए लंबे बाल वाली महिलाएं सुंदरता के साथ-साथ भाग्यशाली मानी जाती हैं। मजबूत और मांसयुक्त जांघ वाली स्त्रियां भी भाग्यशाली होती हैं।
बड़े सिर वाली महिलाएं धनवान और भाग्यशाली मानी जाती हैं। लंबे और मुलायम बाल वाली स्त्रियों के पैरों को मां लक्ष्मी के पैरों के समान माना जाता है।
लंबे हाथ वाली महिलाएं भी भाग्यशाली मानी जाती हैं। गहरी और दाईं ओर झुकी हुई नाभि वाली स्त्रियां धनवान और भाग्यशाली होती हैं, जो अपने परिवार के साथ सुख और समृद्धि का आनंद लेती हैं।