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हरियाणा में कांग्रेस नेता को मिला 78 करोड़ का बिजली बिल, विभाग पर उठे सवाल

हरियाणा के नारनौल में एक कांग्रेस नेता को 78 करोड़ 92 लाख रुपये का बिजली बिल भेजा गया है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। यह बिल उनकी मां के नाम पर जारी किया गया है, जबकि मीटर रीडिंग केवल 6 दिनों की है। परिवार का कहना है कि पहले उनका बिल सामान्य आता था, लेकिन अब करोड़ों का बिल आने से वे चिंतित हैं। प्रारंभिक जांच में इसे तकनीकी गड़बड़ी का परिणाम माना जा रहा है।
 

हरियाणा में बिजली बिल का विवाद


नारनौल: कांग्रेस के एक नेता को दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम द्वारा 78 करोड़ 92 लाख रुपये का बिजली बिल भेजा गया है। यह बिल उनके मोबाइल पर आया, जिसे देखकर वे चौंक गए। यूथ कांग्रेस के जिला अध्यक्ष पुनीत बुलाना ने आरोप लगाया कि यह बिल जानबूझकर भेजा गया है। उनका गांव हसनपुर है, जहां उनकी मां बिमला देवी के नाम पर 10 किलोवाट का एनडीएस कनेक्शन है। इस कनेक्शन से पहले एक छोटी आटा चक्की चलती थी, जो अब दो साल से बंद है।

मीटर रीडिंग में गड़बड़ी

कांग्रेस नेता ने बताया कि उन्हें निगम से एक मैसेज प्राप्त हुआ, जिसमें उनके मां के नाम पर 6 महीने का बिल 78 करोड़ 92 लाख रुपये दर्शाया गया है। यह बिल अप्रैल 2026 की अवधि के लिए है, जबकि मीटर रीडिंग केवल 6 दिनों (15 मार्च से 21 मार्च 2026) की बताई गई है।

बिजली बिल में अजीब आंकड़े

बिल में कुल देय राशि ₹78,92,75,697 है, जिसमें एनर्जी चार्जेस ₹71,69,95,908 और म्युनिसिपल टैक्स ₹1,52,79,316 शामिल हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बिल में 9,99,99,429 यूनिट बिजली खर्च दिखाया गया है, जो किसी भी उपभोक्ता के लिए असंभव है।

भुगतान न करने पर बढ़ेगा बिल

परिवार का कहना है कि पहले उनका बिजली बिल सामान्य आता था। मार्च में उन्होंने लगभग ₹63,546 का भुगतान किया था, लेकिन अब करोड़ों का बिल आने से वे चिंतित हैं। बिल पर 8 अप्रैल 2026 अंतिम तिथि है, और समय पर भुगतान न करने पर यह राशि 80 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।

तकनीकी गड़बड़ी का संदेह

प्रारंभिक जांच में यह मामला सॉफ्टवेयर की तकनीकी गड़बड़ी या डेटा एंट्री में मानवीय त्रुटि का परिणाम माना जा रहा है। हालांकि, विभाग के उच्च अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। आमतौर पर ऐसे मामलों में विभाग बिल को रद्द कर संशोधित बिल जारी करता है, लेकिन इस तरह के बड़े आंकड़े सामने आने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।