हरसिंगार के अद्भुत लाभ और उपयोग
हरसिंगार का परिचय
हरसिंगार का पेड़ आकार में बहुत बड़ा नहीं होता, लेकिन इसके गोल बीज और सुगंधित फूल इसे खास बनाते हैं। जब हवा में इन फूलों की खुशबू फैलती है, तो मन को एक अद्भुत आनंद का अनुभव होता है।
पारिजात वृक्ष की विशेषताएँ
संस्कृत में इसे पारिजात कहा जाता है, जबकि बंगाली में इसे शिउली के नाम से जाना जाता है। इस पेड़ पर छोटे सफेद फूल खिलते हैं, जिनकी डंडी नारंगी रंग की होती है। ये फूल रात में खिलते हैं और सुबह गिर जाते हैं।
रूड़की के विशेषज्ञ कुंवर हरिसिंह के अनुसार, भारत में केवल एक पारिजात वृक्ष उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के रामनगर क्षेत्र में पाया जाता है। यह वृक्ष लगभग 50 फीट ऊँचा है और इसकी शाखाएँ भूमि की ओर झुकती हैं।
हरसिंगार के 15 अद्भुत फायदे
गठिया: हारसिंगार के पांच पत्तों को पीसकर चटनी बनाएं और गर्म पानी में उबालें। इसे ठंडा करके पीने से पुराना गठिया ठीक हो सकता है।
घुटनों की चिकनाई: 10-12 पत्तों को उबालकर पानी पीने से घुटनों की चिकनाई वापस आ सकती है।
साइटिका: हारसिंगार के पत्तों का काढ़ा साइटिका में लाभकारी होता है।
बालों का झड़ना: हारसिंगार के बीज को पीसकर गंजे स्थान पर लगाने से नए बाल उगने लगते हैं।
बुखार: इसके पत्तों का रस चिकनगुनिया, डेंगू और मलेरिया के बुखार में राहत देता है।
बवासीर: पारिजात के बीज का सेवन बवासीर के लिए फायदेमंद है।
यकृत: हारसिंगार के पत्तों का रस यकृत की वृद्धि में सुधार करता है।
हृदय रोग: इसके फूल हृदय के लिए लाभकारी होते हैं।
दाद: पत्तियों का लेप दाद में मदद करता है।
सूखी खाँसी: पत्तियों को शहद में मिलाकर सेवन करने से सूखी खाँसी ठीक होती है।
त्वचा रोग: पत्तियों का लेप त्वचा संबंधी समस्याओं में उपयोगी है।
दमा: छाल का चूर्ण श्वास रोग में लाभकारी होता है।
क्रोनिक बुखार: पारिजात की कोंपल का सेवन स्त्री रोग में लाभ पहुंचाता है।
खुजली: पत्तों और नाचकी के आटे का मिश्रण खुजली में राहत देता है।
ध्यान देने योग्य बातें
हारसिंगार खांसी में हानिकारक हो सकता है। इसके दोषों को दूर करने के लिए कुटकी का उपयोग किया जाता है।