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हंतावायरस का प्रकोप: क्रूज जहाज पर तीन यात्रियों की मौत

अर्जेंटीना से रवाना हुए डच क्रूज जहाज एमवी होंडियस पर हंतावायरस के प्रकोप ने तीन यात्रियों की जान ले ली है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस मामले की पुष्टि करते हुए 12 देशों को अलर्ट किया है। हंतावायरस, जो संक्रमित चूहों के संपर्क से फैलता है, को लेकर स्वास्थ्य विभाग सतर्क है। जानें इसके लक्षण, सुरक्षा उपाय और विशेषज्ञों की टीम की तैनाती के बारे में।
 

हंतावायरस का प्रकोप

अर्जेंटीना से रवाना हुए एक प्रसिद्ध डच क्रूज जहाज, एमवी होंडियस, पर हंतावायरस ने गंभीर संकट उत्पन्न कर दिया है। इस जानलेवा वायरस के कारण जहाज पर सवार तीन विदेशी यात्रियों की दुखद मृत्यु हो चुकी है। इस घटना ने वैश्विक स्वास्थ्य संगठनों और वैज्ञानिकों को सतर्क कर दिया है।


WHO की पुष्टि और अलर्ट

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने जहाज से जुड़े आठ मामलों की आधिकारिक पुष्टि की है। इनमें से पांच मामलों में हंतावायरस संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है, जबकि तीन अन्य मामले संदिग्ध हैं। यह बीमारी प्रारंभ में सामान्य फ्लू जैसी प्रतीत होती है, लेकिन बाद में यह गंभीर और जानलेवा हो सकती है।


12 देशों में हाई अलर्ट

WHO ने ब्रिटेन, अमेरिका और जर्मनी सहित 12 देशों को इस वायरस के प्रति सतर्क रहने का निर्देश दिया है। इन देशों के कई नागरिक सेंट हेलेना में इस संक्रमित क्रूज से सुरक्षित उतरे थे। स्वास्थ्य अधिकारियों ने राहत की सांस ली है क्योंकि अन्य यात्रियों में वायरस के लक्षण नहीं पाए गए हैं।


हंतावायरस की प्रकृति

WHO के प्रमुख ने स्पष्ट किया है कि हंतावायरस कोविड-19 जैसी कोई नई महामारी नहीं है। यह वायरस आमतौर पर संक्रमित चूहों के मल-मूत्र और लार के संपर्क में आने से फैलता है और यह केवल बंद स्थानों में ही फैलता है।


विशेषज्ञों की टीम की तैनाती

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए WHO का एक वरिष्ठ विशेषज्ञ क्रूज पर तैनात किया गया है। उनके साथ नीदरलैंड के दो डॉक्टर और यूरोपीय नियंत्रण केंद्र का एक विशेषज्ञ भी है। यह टीम कैनेरी द्वीप समूह पहुंचने तक यात्रियों की स्वास्थ्य जांच करेगी।


हंतावायरस के लक्षण

हंतावायरस का संक्रमण धीरे-धीरे होता है और शुरुआत में दर्द जैसा अनुभव होता है। लेकिन कुछ समय बाद यह मरीज की रक्त वाहिकाओं को कमजोर कर देता है, जिससे फेफड़ों में पानी भरने की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसे गंभीर मामलों में मरीज को केवल ईसीएमओ मशीन से ही बचाया जा सकता है।


सुरक्षा उपाय

स्वास्थ्य एजेंसियां इस जानलेवा संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी कर रही हैं। जहाज पर सभी आवश्यक सावधानियां बरती जा रही हैं, क्योंकि वायरस की इनक्यूबेशन अवधि लगभग छह हफ्ते तक हो सकती है।