स्क्रीन टाइम का प्रभाव: याददाश्त में कमी के कारण और समाधान
स्क्रीन टाइम का प्रभाव
कहा जाता है कि उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त कमजोर होने लगती है, लेकिन अब युवा भी जल्दी चीजें भूलने लगे हैं। मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता ने सभी उम्र के लोगों में मेमोरी से जुड़ी समस्याएं बढ़ा दी हैं।
फोन का मस्तिष्क पर प्रभाव
गैजेट्स पर निर्भरता से मस्तिष्क की प्राकृतिक क्षमता कम हो रही है। फोन हमारे जीवन को सरल बनाने के लिए है, लेकिन अब यह हमारी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बन गया है। इसके कारण मस्तिष्क को पर्याप्त कार्य नहीं मिल रहा, जिससे उसकी सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नई जानकारी को याद रखने में मस्तिष्क को कठिनाई हो रही है।
मल्टीटास्किंग का नुकसान
व्यस्त जीवनशैली में हम सोचते हैं कि हम एक साथ कई कार्य कर सकते हैं। हालांकि, इससे संतोष की कमी और थकान बढ़ती है। लंबे समय तक दिमाग पर दबाव डालने से सोचने, तर्क करने और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो रही है, जो भूलने की आदत का एक बड़ा कारण बन रहा है।
भूलने के लक्षण
- जब पास में फोन या अन्य गैजेट न हो, तो घबराहट महसूस होना।
- सरल कार्यों को पूरा करने में कठिनाई।
- समस्याओं का सामना करने में हताशा।
- निर्णय लेने की क्षमता में कमी।
- याददाश्त कमजोर होने के कारण सामाजिक संबंधों में कमी।
- संवाद में कठिनाई।
- ब्रेन फॉगिंग।
- फोटो को समझने में परेशानी।
समस्याओं से निजात पाने के उपाय
अपने दिमाग को कुछ समय के लिए आराम दें और उसे सक्रिय रखने के लिए ब्रेन इंगेजिंग गतिविधियों में शामिल करें। डिजिटल जीवन को व्यवस्थित करें। इसके लिए अनावश्यक ऐप्स को हटाएं, बेकार के संदेशों को नजरअंदाज करें और नोटिफिकेशन बंद करें। किताबों में ध्यान लगाकर स्क्रॉलिंग से बचें।
अन्य उपाय
- संगीत वाद्ययंत्र बजाना।
- अर्थपूर्ण पॉडकास्ट सुनना।
- नक्शा पढ़ने का प्रयास करना।
- दिशा का पता लगाने की कोशिश करना।
- पहेलियाँ, शतरंज, क्रॉसवर्ड और ब्रेन टीज़र का अभ्यास करना।
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
- एकाग्रता में समस्या।
- इच्छाशक्ति में कमी।
- सामान्य जीवन में व्यवधान।
- तनाव और चिंताओं का बढ़ना।
- बिना फोन के काम करना कठिन लगना।
- फोन खोने या खराब होने का डर।