सौर ऊर्जा की क्रांति: इंदौर के सनावादिया गांव में विज्ञान दिवस का उत्सव
सौर ऊर्जा का अनूठा उदाहरण
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर मध्य प्रदेश के इंदौर के पास स्थित सनावादिया गांव में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया गया। जिमी मैकगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट में छात्रों ने बैटरी-रहित सोलर कुकर और जैव विविधता फार्म का प्रत्यक्ष अनुभव किया।
सस्टेनेबल लिविंग का मॉडल
यह केंद्र, जिसे पद्म श्री से सम्मानित जनक पालता मैकगिलिगन द्वारा संचालित किया जाता है, सस्टेनेबल लिविंग और नवीकरणीय ऊर्जा का एक जीवंत उदाहरण है। यहां ग्रामीण महिलाओं, छात्रों और किसानों को सौर ऊर्जा के उपयोग के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे धुएं से मुक्त खाना पकाने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है।
छात्रों का अनुभव
28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों ने इस केंद्र का दौरा किया। उन्होंने बैटरी-रहित सोलर कुकर का प्रदर्शन देखा, जो सीधे सूर्य की किरणों से खाना पकाता है। छात्रों ने लाल चौलाई जैसी सब्जियां बनाकर देखा और पाया कि यह मैगी से भी कम समय में तैयार हो गई।
जैव विविधता और सस्टेनेबल एग्रीकल्चर
केंद्र के जैव विविधता फार्म में छात्रों ने जैविक खेती, विभिन्न पौधों की प्रजातियों, मधुमक्खी पालन और सस्टेनेबल एग्रीकल्चर के तरीकों को समझा। यहां सौर ऊर्जा से संचालित सुविधाएं जैसे सोलर ड्रायर, बेकरी और कम्युनिटी किचन भी हैं, जो वर्षों से एक टन से अधिक लकड़ी बचाकर कार्बन उत्सर्जन को कम कर रही हैं।
विज्ञान और पर्यावरण के प्रति जागरूकता
यह कार्यक्रम छात्रों में विज्ञान, पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी तकनीकों के प्रति उत्साह जगाने में सफल रहा। जनक मैकगिलिगन ने बताया कि केंद्र ने अब तक लाखों लोगों को सौर ऊर्जा और सस्टेनेबल लिविंग की ट्रेनिंग दी है, जिसमें स्कूल और कॉलेज के छात्र प्रमुख हैं।
भारत की सौर ऊर्जा में आत्मनिर्भरता
ऐसे प्रयास भारत को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और जलवायु परिवर्तन से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सनावादिया अब सौर क्रांति का एक प्रेरणादायक केंद्र बन चुका है!