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सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव: भारत में बढ़ती मांग और वैश्विक गिरावट

सोने की कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को चिंतित कर दिया है। जनवरी में उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद, कीमतों में गिरावट आई है। हालांकि, भारतीय बाजार में सोने की कीमतों में वृद्धि देखी गई है, जो वैश्विक गिरावट के विपरीत है। जानें कि इसके पीछे के कारण क्या हैं और भविष्य में सोने की कीमतों का क्या हो सकता है।
 

सोने की कीमतों में हालिया बदलाव


सोने की कीमतों में पिछले कुछ समय से लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इस साल जनवरी में सोने की कीमतें अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थीं, लेकिन उसके बाद से इसमें काफी गिरावट आई है। आज, सोमवार को भी सोने की कीमतों में कमी आई है, जिससे उन निवेशकों में चिंता बढ़ गई है जो सोने में निवेश करने की योजना बना रहे थे।


वैश्विक और भारतीय बाजारों में अंतर

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मई में वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में 1.4 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि भारतीय बाजार में इसके विपरीत 4.1 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि मई के अंत में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 4,546 डॉलर प्रति औंस थी। भारतीय बाजार में, इस साल अब तक सोने ने निवेशकों को लगभग 20 प्रतिशत का शानदार रिटर्न दिया है।


भारत में सोने की कीमतों में वृद्धि के कारण

जबकि वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतें गिर रही थीं, भारत में इसके दाम बढ़ने का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और सर्राफा बाजारों में हलचल है। हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से सोने की खरीदारी को कुछ समय के लिए टालने की अपील की थी। इस अपील के कारण भारत, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे बाजारों में सोने की मांग में कमी आई है।


सोने की कीमतों का ऐतिहासिक पैटर्न

पिछले 20 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह स्पष्ट होता है कि जब भी सोने की कीमतों में तेजी आती है, उसके बाद एक बड़ी गिरावट भी होती है। सितंबर 2022 में शुरू हुई सोने की रैली ने इस साल 29 जनवरी को 5,594.82 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड बनाया था। हालांकि, इस उच्चतम स्तर के बाद से सोने की कीमतों में गिरावट आई है, और वर्तमान में यह 4,368 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है।