सोनिया गांधी का मोदी सरकार पर आरोप: छात्रों को दुश्मन की तरह पेश किया जा रहा है
सोनिया गांधी का बयान
नई दिल्ली, 24 जुलाई: कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि परीक्षा प्रश्नपत्र लीक और शिक्षा व्यवस्था के गिरते स्तर के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों को नरेंद्र मोदी सरकार 'देश के दुश्मन' की तरह दिखा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार दमनकारी ताकतों का सहारा लेकर छात्रों की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। एक अंग्रेजी दैनिक में लिखे अपने लेख में उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें स्पष्ट हैं: भारत सरकार की जवाबदेही तय हो और शिक्षा में सुधार किया जाए।
सोनिया गांधी ने कहा, 'मोदी सरकार ने छात्रों की बहादुरी का जवाब कायरता और क्रूरता से दिया है।' उन्होंने 20 जुलाई की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि यह 'शर्मनाक दिन' था, जब दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों ने प्रदर्शनकारियों पर 'बिना किसी उकसावे के हिंसा' का सहारा लिया।
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
सोनिया गांधी ने लिखा, 'इसने हमारी सामूहिक अंतरात्मा को झकझोर दिया है।' उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार संवाद के बजाय हिंसा का सहारा लेती है और असहमति को दबाने की प्रवृत्ति दिखाती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों के खिलाफ दमनकारी शक्ति का इस्तेमाल किया है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि छात्रों के आंदोलन को बदनाम करने के लिए सरकार ने 'हर असहमति को राष्ट्र-विरोधी बताने वाले पुराने टूलकिट' का इस्तेमाल किया है।
शिक्षा के बजट में कमी
सोनिया गांधी ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े तीन 'मूलभूत मुद्दों' को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि स्कूल और उच्च शिक्षा पर बजट में खर्च का अनुपात क्रमशः 50 प्रतिशत और 33 प्रतिशत कम हुआ है। उन्होंने सवाल किया, 'क्या कोई इस तरह के बेतुके तरीके से पीछे हटने में कोई तुक देख सकता है?'
उन्होंने पिछले 12 वर्षों में लगभग एक लाख सरकारी स्कूलों के बंद होने और 43,000 निजी स्कूलों के खुलने का आरोप लगाया।
उच्च शिक्षा की स्थिति
सोनिया गांधी ने कहा कि उच्च शिक्षा में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने विश्वविद्यालयों को मिलने वाले अनुदान में कटौती की है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण और सस्ती सार्वजनिक शिक्षा की कमी के कारण परिवारों को अपने बच्चों की शिक्षा पर अधिक खर्च करना पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) की कोचिंग पर परिवारों द्वारा खर्च की जाने वाली राशि उतनी है, जितना मोदी सरकार सार्वजनिक शिक्षा पर निवेश करती है।
प्रश्नपत्र लीक और शिक्षा में संकट
सोनिया गांधी ने पिछले 12 वर्षों में 152 प्रश्नपत्र लीक होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में अयोग्य कुलपतियों की नियुक्ति और राजनीतिक रूप से जुड़े शिक्षकों की भर्ती ने शिक्षण में संकट पैदा कर दिया है।
उन्होंने कहा कि छात्रों को एक ऐसी व्यवस्था में सफल होने की कोशिश करनी पड़ रही है जिसकी मांगें लगातार बढ़ रही हैं।
मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल
सोनिया गांधी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था महंगी होती जा रही है और इसमें भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की 'जवाबदेही से बचने' की नीति एक तरह से 'ताबूत में आखिरी कील' है।
उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को बिना व्यापक सहमति के मंजूरी दी गई।
छात्रों के भविष्य की रक्षा
सोनिया गांधी ने कहा कि छात्रों ने मोदी सरकार के झांसे को चुनौती दी है। उनके साथ खड़ा होना और उनके भविष्य की रक्षा करना हमारा नैतिक, राजनीतिक और संवैधानिक कर्तव्य है।