सोनम वांगचुक ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लोकतंत्र की जीत बताया
सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत किया, इसे लोकतंत्र की जीत बताया। उन्होंने सुधार की दिशा में आगे बढ़ने का आग्रह किया और प्रदर्शनकारियों की धैर्य की सराहना की। प्रधान का इस्तीफा छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए लिया गया है। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की कहानी और वांगचुक के विचार।
Jul 25, 2026, 16:36 IST
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और उसके प्रभाव
सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत करते हुए इसे लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण जीत करार दिया। उन्होंने देश से सुधार की दिशा में जवाबदेही की ओर बढ़ने का आग्रह किया। प्रधान ने शनिवार को अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि यह निर्णय छात्रों के भविष्य की सुरक्षा और दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं के बड़े विरोध-प्रदर्शन का लाभ उठाने वाली राष्ट्र-विरोधी ताकतों को रोकने के लिए लिया गया है।
यह कदम केंद्र और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच बातचीत के तीसरे दौर से कुछ घंटे पहले उठाया गया। CJP ने कहा कि प्रधान का इस्तीफा बिना किसी समझौते के होना चाहिए। इस घोषणा के बाद जंतर-मंतर पर जश्न मनाया गया, जहां वांगचुक प्रदर्शनकारियों के साथ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे। उन्होंने इस घटनाक्रम को सीधे सड़कों से निकली प्रत्यक्ष लोकतंत्र की जीत बताया और आंदोलन के शांतिपूर्ण स्वरूप की सराहना की।
वांगचुक ने CJP और "देश की Gen Z" को उनके धैर्य और दृढ़ता के लिए बधाई दी। उन्होंने जवाबदेही की मांग करने वाले देशभर के नागरिकों का भी धन्यवाद किया। वांगचुक ने X पर लिखा कि यह शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है। उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि अब शिक्षा व्यवस्था में ढांचागत बदलाव लाने पर ध्यान देना आवश्यक है।
सूत्रों के अनुसार, प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया, उन्हें हटाया नहीं गया था। यह दर्शाता है कि सरकार उन्हें सम्मानजनक विदाई देना चाहती थी। ओडिशा में जन्मे बीजेपी नेता 2021 से केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यरत थे और 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी के सत्ता में लौटने के बाद उन्हें फिर से नियुक्त किया गया था।