सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स पर लगाया अंतरिम प्रतिबंध, 15 लाख करोड़ रुपये के गड़बड़ी के आरोप
राजेश एक्सपोर्ट्स पर सेबी की कार्रवाई
भारतीय शेयर बाजार के नियामक ने ज्वेलरी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड के चेयरमैन राजेश मेहता और अन्य प्रमोटर्स पर अंतरिम प्रतिबंध लगा दिया है। सेबी के 109 पन्नों के आदेश में यह आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व को गलत तरीके से प्रस्तुत किया। जांच में विदेशी सहायक कंपनियों के कारोबार, बिक्री आंकड़ों और वित्तीय खुलासों में अनियमितताएं सामने आई हैं.
सेबी की जांच का कारण
सेबी के अनुसार, वित्त वर्ष 2021 से 2025 के दौरान कंपनी के कुल रिपोर्टेड राजस्व का लगभग 99.8 प्रतिशत हिस्सा गलत तरीके से दिखाया गया हो सकता है। यह राशि 15.15 लाख करोड़ रुपये के करीब है। यह जांच मार्च 2024 में एक शेयरधारक द्वारा की गई शिकायत के बाद शुरू हुई थी, जिसमें कंपनी की बैलेंस शीट में बड़े ट्रेड रिसीवेबल्स और संभावित वित्तीय गड़बड़ियों का जिक्र किया गया था.
विदेशी सहायक कंपनियों की भूमिका
सेबी के आदेश में कहा गया है कि राजेश एक्सपोर्ट्स ने दावा किया था कि उसके समेकित राजस्व का 97 से 99 प्रतिशत हिस्सा विदेशी सहायक कंपनियों से आता है। इनमें स्विट्जरलैंड स्थित वैलकैम्बी एसए को समूह की प्रमुख परिचालन इकाई बताया गया था। हालांकि, जांच में सेबी को कंपनी के समेकित राजस्व और वैलकैम्बी एसए के स्वतंत्र ऑडिटेड खातों के बीच बड़ा अंतर मिला.
जानकारी की कमी
सेबी ने आरोप लगाया कि कंपनी ने जांच के दौरान बिक्री, खरीद, देनदार, लेनदार और इन्वेंट्री से संबंधित डेटा उपलब्ध नहीं कराया। कंपनी ने इसके पीछे स्विस डेटा प्रोटेक्शन कानूनों का हवाला दिया, लेकिन सेबी ने इसे खारिज कर दिया। नियामक ने स्पष्ट किया कि भारतीय बाजार में सूचीबद्ध किसी भी कंपनी को पारदर्शिता संबंधी नियमों का पालन करना आवश्यक है.
विपरीत आंकड़े
जांच के दौरान कंपनी द्वारा प्रस्तुत ग्राहक-वार बिक्री आंकड़ों में भी कई विसंगतियां पाई गईं। कुछ ग्राहक एक रिकॉर्ड में मौजूद थे, जबकि दूसरे में नहीं। इसके अलावा, एक ही ग्राहक के लिए अलग-अलग फाइलिंग में बिक्री के आंकड़े भी भिन्न पाए गए। सेबी का मानना है कि ये विसंगतियां वित्तीय रिपोर्टिंग की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाती हैं.