सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर के प्रभावों पर चर्चा की
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की स्थिति
सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन दो महत्वपूर्ण घटनाओं का उल्लेख किया, जिनके कारण पाकिस्तान को पिछले साल 10 मई को भारत के साथ युद्धविराम की मांग करनी पड़ी। उन्होंने बताया कि भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर सशस्त्र बलों को विशेष निर्देश दिए गए थे। 10 मई की सुबह, तीनों सशस्त्र बलों को यह निर्देश दिया गया कि यदि स्थिति बिगड़ती है तो उन्हें क्या करना चाहिए। जनरल द्विवेदी ने कहा, "लड़ाई जारी रहने पर क्या होगा, यह संदेश सभी संबंधित लोगों को स्पष्ट था।" हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह सभी जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा नहीं कर सकते।
पाकिस्तान की सैन्य गतिविधियों पर नजर
जनरल द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि इन निर्देशों का उद्देश्य वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास उपग्रह से प्राप्त तस्वीरें थीं, जो भारतीय नौसेना की गतिविधियों को दर्शाती थीं। जब उन्होंने सभी पहलुओं का विश्लेषण किया, तो उन्हें लगा कि युद्धविराम का यही सही समय है। इसके बाद, पाकिस्तान ने सैन्य संचालन महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई के माध्यम से भारत से युद्धविराम पर सहमति मांगी।
आतंकवादी ठिकानों पर हमले का प्रभाव
जनरल द्विवेदी ने बताया कि पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी शिविरों पर सफल हमलों ने स्थिति को बदल दिया। उन्होंने ऑपरेशन के प्रारंभिक चरण में 22 मिनट के हमलों का जिक्र किया, जिसने दूसरी तरफ की निर्णय लेने की प्रक्रिया को प्रभावित किया। हालांकि, उन्होंने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, लेकिन कहा कि वे इस स्थिति को तुरंत समझ नहीं पाए और इसके बाद पत्थर फेंकने, ड्रोन और मिसाइलों का सहारा लिया।