सुवेंदु अधिकारी: पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार
पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद, सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार बनकर उभरे हैं। भाजपा की आगामी बैठक में उनके विधायक दल के नेता बनने की संभावना है। अधिकारी की नंदीग्राम में जीत ने उन्हें राज्य में भाजपा का सबसे मजबूत चेहरा बना दिया है। यदि उन्हें चुना जाता है, तो यह राज्य की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव का संकेत होगा। जानें इस राजनीतिक परिदृश्य के बारे में और क्या हो सकता है आगे।
May 6, 2026, 12:16 IST
पश्चिम बंगाल में भाजपा की संभावनाएं
जानकारों के अनुसार, 2026 के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की शानदार जीत के बाद सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार के रूप में उभरे हैं। भाजपा 8 मई को कोलकाता में एक महत्वपूर्ण विधानसभा बैठक आयोजित करने जा रही है, जिसमें सरकार गठन और नेतृत्व पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इस बैठक में अधिकारी के भाजपा विधायक दल के नेता बनने की संभावना है, जो सरकार बनाने का दावा पेश करने से पहले एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई का नेतृत्व
सूत्रों के अनुसार, भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के प्रमुख सामिक भट्टाचार्य अधिकारी का नाम प्रस्तावित करेंगे, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा इस निर्णय की औपचारिक घोषणा की संभावना है। इस चुनाव में अधिकारी का उदय एक महत्वपूर्ण घटना रही है। पहले ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले अधिकारी ने बाद में पाला बदलकर उनके सबसे कड़े राजनीतिक विरोधियों में से एक बन गए।
नंदीग्राम में जीत का महत्व
अधिकारी ने राष्ट्रीय स्तर पर तब सुर्खियां बटोरीं जब उन्होंने नंदीग्राम के चर्चित चुनाव में बनर्जी को हराया। नंदीग्राम एक प्रतीकात्मक निर्वाचन क्षेत्र है, जिसने ममता बनर्जी की राजनीतिक यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 2026 के चुनावों में, अधिकारी ने न केवल बनर्जी पर अपनी जीत दोहराई, बल्कि जीत का अंतर भी बढ़ाया, जिससे राज्य में भाजपा के सबसे मजबूत चेहरे के रूप में उनकी स्थिति और मजबूत हुई।
भाबनीपुर में विजय और राजनीतिक बदलाव
उन्होंने बनर्जी के लंबे समय से गढ़ रहे भाबनीपुर पर भी कब्जा कर लिया, जो पश्चिम बंगाल में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव का संकेत है। भाजपा को निर्णायक जनादेश मिलने के बाद, अब सारा ध्यान नेतृत्व चयन और सरकार गठन पर केंद्रित हो गया है। यदि अधिकारी को चुना जाता है, तो यह एक ऐतिहासिक क्षण होगा, जिससे राज्य में दशकों से चले आ रहे प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दलों के वर्चस्व का अंत होगा।