सुप्रीम कोर्ट में रोमियो-जूलियट क्लॉज़ का मामला: किशोरों की सुरक्षा पर नया दृष्टिकोण
रोमियो और जूलियट की कहानी का नया अध्याय
आपने विलियम शेक्सपियर के प्रसिद्ध नाटक 'रोमियो और जूलियट' के बारे में सुना होगा, जिसमें दो प्रेमी अपने परिवारों की दुश्मनी के कारण दुखद अंत का सामना करते हैं। आज, भारत की सर्वोच्च न्यायालय में इस नाटक का नाम फिर से चर्चा में है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक निर्णय के चलते, जिसमें यौन शोषण के एक मामले में आरोपी को रिहा किया गया, यह मामला सामने आया। अदालत ने आरोपी की रिहाई का आधार लड़की की उम्र और उसके स्कूल के प्रमाणपत्र में अंतर को बताया। यूपी सरकार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
मामले का संक्षिप्त विवरण
यह मामला उत्तर प्रदेश के शामली से संबंधित है, जहां एक व्यक्ति पर नाबालिग लड़की के साथ कई बार बलात्कार करने का आरोप था। आरोपी ने लड़की के अश्लील वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल किया। 2 दिसंबर 2024 को एफआईआर दर्ज की गई, और सेशन कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। हालांकि, अप्रैल 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत दे दी, यह कहते हुए कि लड़की की उम्र स्पष्ट नहीं थी। यूपी सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
सुप्रीम कोर्ट का दृष्टिकोण
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन कानूनों का उद्देश्य केवल बच्चों की सुरक्षा नहीं है, बल्कि किशोरों के बीच सहमति से बने संबंधों की रक्षा भी है। कोर्ट ने यह भी बताया कि परिवार अक्सर इन संबंधों का विरोध करते हैं, जिससे किशोरों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होते हैं।
सुरक्षा बनाम व्यक्तिगत स्वतंत्रता
पीओसीएसओ अधिनियम के तहत, 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को बच्चा माना जाता है। यह अधिनियम नाबालिगों की सहमति को मान्यता नहीं देता। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि इस अधिनियम का दुरुपयोग समाज में गंभीर समस्याएं उत्पन्न कर रहा है।
कानून में बदलाव की आवश्यकता
कानून में संशोधन की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। इस संदर्भ में, न्यायालय की अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने सहमति की आयु को कम करने का समर्थन किया है। उन्होंने तर्क दिया कि 16 से 18 वर्ष के किशोरों में यौन स्वायत्तता के संबंध में निर्णय लेने की क्षमता होती है।
सरकार का रुख
केंद्र सरकार ने सहमति की आयु में किसी भी बदलाव का विरोध किया है। सरकार का कहना है कि 18 वर्ष की आयु एक महत्वपूर्ण निर्णय है, जिसका उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।