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सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी को दी चेतावनी, जांच में दखल को बताया खतरा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले, सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को जांच में दखल देने पर कड़ी चेतावनी दी है। अदालत ने कहा कि इस तरह का हस्तक्षेप लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के लिए खतरा है। साथ ही, प्रवर्तन निदेशालय ने तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ कार्रवाई को तेज करते हुए उन्हें समन जारी किया है। जानें इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बारे में अधिक जानकारी।
 

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के पहले चरण से एक दिन पूर्व, सुप्रीम कोर्ट ने I-PAC रेड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सख्त चेतावनी दी। अदालत ने कहा कि उनकी दखलंदाजी से लोकतांत्रिक प्रक्रियाएँ संकट में पड़ गई हैं। यह टिप्पणी बुधवार को सुनवाई के दौरान आई। बेंच ने स्पष्ट किया कि यह केंद्र और राज्य के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि एक ऐसी स्थिति है जहाँ एक मुख्यमंत्री जांच के महत्वपूर्ण चरण में हस्तक्षेप कर रही हैं।


लोकतंत्र के लिए खतरा

कोर्ट ने कहा कि इस तरह का व्यवहार सीधे लोकतांत्रिक ढांचे के लिए खतरा उत्पन्न करता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यह राज्य और केंद्र के बीच का मामला नहीं है, बल्कि एक ऐसा मामला है जिसमें एक मुख्यमंत्री जांच के दौरान दखल दे रही हैं, जिससे लोकतंत्र को खतरा हो रहा है। जजों ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि इस देश में ऐसा दिन आएगा जब कोई मुख्यमंत्री जांच में हस्तक्षेप करेगा। बेंच ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने पूरे सिस्टम को खतरे में डाल दिया है।


ED की कार्रवाई तेज

ED ने TMC नेताओं पर शिकंजा कसा

एक अन्य घटनाक्रम में, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और तेज कर दिया है। एजेंसी ने पार्टी के उम्मीदवारों सुजीत बोस और रथिन घोष को चौथा समन जारी किया है और उन्हें 24 अप्रैल को पेश होने का निर्देश दिया है। सुजीत बोस 2026 के चुनावों में बिधाननगर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि रथिन घोष मध्यमग्राम से मैदान में हैं।