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सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान से पलायन कर रहे हिंदुओं के लिए आवास की आवश्यकता पर जोर दिया

सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान से पलायन कर रहे अनुसूचित जाति के हिंदुओं की स्थिति पर चिंता जताई है। न्यायालय ने कहा कि केवल नागरिकता देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इन समुदायों को सम्मानजनक आवास भी उपलब्ध कराना आवश्यक है। अदालत ने सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया और बेदखली अभियानों पर रोक लगा दी। यह निर्णय लगभग 250 परिवारों को प्रभावित करता है, जो वर्षों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं और अब अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
 

सुप्रीम कोर्ट की चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान से भागकर आए अनुसूचित जाति के हिंदुओं की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की है। न्यायालय ने कहा कि केवल भारतीय नागरिकता प्रदान करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी आवश्यक है कि सरकार इन लोगों को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराए। यह टिप्पणी दिल्ली के मजनू का टीला क्षेत्र में सिग्नेचर ब्रिज के निकट रहने वाले परिवारों के संभावित विस्थापन से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान की गई। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन कोटेश्वर सिंह की पीठ ने बताया कि नागरिकता मिलने के बावजूद, इन निवासियों को क्षेत्र से बेदखल होने का खतरा बना हुआ है।


आवास और पुनर्वास की आवश्यकता

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नागरिकता के साथ-साथ उचित पुनर्वास और आवास के उपायों की आवश्यकता है, ताकि ये समुदाय गरिमापूर्ण जीवन जी सकें। न्यायालय ने सरकार को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही, इस दौरान किसी भी प्रकार के बेदखली अभियान या विकास परियोजनाओं पर रोक लगा दी गई है, जिससे परिवारों का विस्थापन हो सकता है। यह अंतरिम सुरक्षा लगभग 250 परिवारों को प्रभावित करती है, जिससे 1,000 से अधिक लोग प्रभावित हो रहे हैं, जो वर्षों से इस क्षेत्र में निवास कर रहे हैं और अब अपने आवास और पुनर्वास के संबंध में अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।