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सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा की ट्रांजिट बेल बढ़ाने से किया इनकार

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है, जब कोर्ट ने उनकी ट्रांजिट बेल बढ़ाने से इनकार कर दिया। उन्हें असम की अदालत में जाने का निर्देश दिया गया है। यह घटनाक्रम तब हुआ जब सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा दी गई अग्रिम ज़मानत पर रोक लगा दी थी। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और कोर्ट के आदेश के पीछे की वजह।
 

सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

कांग्रेस के सांसद पवन खेड़ा को एक बड़ा झटका तब लगा जब सुप्रीम कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा द्वारा दायर मामले में उनकी ट्रांजिट बेल की अवधि बढ़ाने से मना कर दिया। कोर्ट ने उन्हें इस मामले में असम की अदालत में जाने का निर्देश दिया। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अग्रिम ज़मानत पर रोक लगाने का आदेश दिया था, जो तेलंगाना हाई कोर्ट ने दी थी। यह आदेश दो न्यायाधीशों की बेंच ने जारी किया, जिसमें जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर शामिल थे।


कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 15 अप्रैल का आदेश उस अधिकार क्षेत्र वाले कोर्ट पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं डालेगा, जो कांग्रेस नेता की याचिका पर निर्णय करेगा।


कोर्ट ने यह भी कहा कि न तो सुप्रीम कोर्ट और न ही तेलंगाना हाई कोर्ट असम के उस कोर्ट के कार्य में हस्तक्षेप करेगा, जो इस मामले की सुनवाई करेगा।


एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बेंच ने कहा कि याचिका पर निर्णय लेने वाला कोर्ट ट्रांजिट बेल देने या किसी अन्य आदेश से प्रभावित नहीं होगा। इसका अर्थ है कि जब सक्षम कोर्ट के समक्ष अग्रिम ज़मानत के लिए याचिका प्रस्तुत की जाएगी, तो वह अपने विवेक से निर्णय करेगा, न कि किसी पूर्व आदेश के आधार पर। कोर्ट ने आगे कहा कि प्रतिवादी को उचित कोर्ट में जाने की पूरी स्वतंत्रता है। यदि कोर्ट कार्य नहीं कर रहा है, तो रजिस्ट्री से अनुरोध किया जा सकता है, और रजिस्ट्री कानून के अनुसार कार्य करेगी। इस संदर्भ में, यह याचिका अब समाप्त मानी जाएगी।