सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा की ट्रांजिट बेल पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की ट्रांजिट बेल पर रोक लगा दी है। जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की पीठ ने असम सरकार की याचिका पर पवन खेड़ा को नोटिस जारी करते हुए तेलंगाना हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। 10 अप्रैल को तेलंगाना हाईकोर्ट ने पवन खेड़ा को एक हफ्ते की ट्रांजिट बेल दी थी, जिसके बाद असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। दिल्ली में सीनियर एडवोकेट अनिल कुमार सिंह 'श्रीनेत' ने सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय का विश्लेषण किया है और बताया है कि पवन खेड़ा के पास अब क्या विकल्प हैं।
ट्रांजिट बेल और ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया
अनिल कुमार सिंह श्रीनेत के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ एक राज्य में एफआईआर दर्ज है और वह दूसरे राज्य में पाया जाता है, तो पुलिस को उस व्यक्ति को ट्रांजिट रिमांड के लिए संबंधित राज्य के कोर्ट से अनुमति लेनी होगी। पुलिस को यह भी बताना होगा कि उस व्यक्ति को वापस संबंधित राज्य में ले जाने में कितना समय लगेगा। आरोपी या उसके वकील को ट्रांजिट बेल की मांग करने का अधिकार होता है, जिसका उद्देश्य आरोपी को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करना है।
ट्रांजिट बेल की स्वीकृति की चुनौतियाँ
अनिल कुमार सिंह श्रीनेत के अनुसार, जब आरोपी को गिरफ्तार किया जाता है, तो उसे वहां की कोर्ट से ट्रांजिट बेल मिलना कठिन होता है। अक्सर, यह याचिका खारिज हो जाती है क्योंकि संबंधित राज्य का कोर्ट मामले से अवगत नहीं होता।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का प्रभाव
सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रांजिट बेल पर रोक लगाने के बाद, पवन खेड़ा को असम में पेश होना होगा। उनकी गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है, क्योंकि मामला असम में ही चलेगा। अब पवन खेड़ा को असम की कोर्ट में पेश होना पड़ेगा और पुलिस जांच में सहयोग करना होगा।
पवन खेड़ा के पास विकल्प
अनिल कुमार सिंह श्रीनेत के अनुसार, पवन खेड़ा के पास अब केवल एक विकल्प है। उन्हें असम की अदालत में तुरंत सामान्य एंटीसिपेटरी बेल के लिए याचिका दायर करनी होगी। यदि सेशन कोर्ट में यह याचिका खारिज होती है, तो उन्हें गुवाहाटी हाईकोर्ट का रुख करना होगा, और यदि वहां भी राहत नहीं मिलती है, तो उन्हें फिर से सुप्रीम कोर्ट जाना होगा।
एंटीसिपेटरी बेल की संभावना
अनिल कुमार सिंह का कहना है कि पवन खेड़ा को असम की कोर्ट से एंटीसिपेटरी बेल मिल सकती है, क्योंकि इस मामले में कोई गंभीर अपराध नहीं हुआ है। उनके द्वारा दिए गए बयान सभी प्लेटफार्मों पर उपलब्ध हैं, इसलिए उन्हें कस्टोडियल इंटेरोगेशन की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
ट्रांजिट रिमांड का कानूनी अर्थ
लाइव लॉ के अनुसार, रिमांड का अर्थ हिरासत है। दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 41 के तहत पुलिस किसी व्यक्ति को कब गिरफ्तार कर सकती है, इसका उल्लेख है। यदि कोई व्यक्ति बिना वारंट के गिरफ्तार किया जाता है, तो उसे 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाना चाहिए।
पवन खेड़ा के विवादास्पद बयान
पवन खेड़ा ने 5 अप्रैल को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा के बारे में कहा था कि उनके पास तीन चालू पासपोर्ट हैं और विदेश में संपत्ति है। इसी बयान के बाद उनके खिलाफ असम में एफआईआर दर्ज की गई थी।