सुप्रीम कोर्ट ने ट्विशा शर्मा की अप्राकृतिक मौत के मामले में सुनवाई की
सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल में 32 वर्षीय एक्टर-मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में महत्वपूर्ण सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता में हुई इस सुनवाई में दहेज उत्पीड़न और वैवाहिक विवादों पर चर्चा हुई। कोर्ट ने मीडिया ट्रायल से बचने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने पर जोर दिया। सुनवाई के दौरान, SG मेहता ने एक विवादास्पद टिप्पणी की, जबकि कोर्ट ने जांच को CBI को सौंपने की संभावना पर विचार किया। इस मामले में सार्वजनिक बयानबाज़ी से बचने की अपील की गई है।
May 25, 2026, 12:34 IST
सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाई
भारत की सर्वोच्च न्यायालय ने भोपाल में 32 वर्षीय एक्टर-मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए सोमवार को एक महत्वपूर्ण सुनवाई की। इस दौरान कोर्टरूम में दहेज उत्पीड़न और वैवाहिक विवादों पर तीखी बहस हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता में बेंच ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करना है।
मीडिया ट्रायल पर चेतावनी
कोर्ट ने इस मामले में मीडिया ट्रायल और लोगों के पूर्वाग्रहों से सावधान रहने की सलाह दी। यह सुनवाई तब हुई जब सुप्रीम कोर्ट ने खुद ही इस मामले का संज्ञान लिया, जिसमें आरोप लगे थे कि भोपाल में ट्विशा की मौत की जांच में संस्थागत पक्षपात और प्रक्रियागत गड़बड़ियां हुई हैं।
सुनवाई में उठे सवाल
इस मामले को "In Re: Alleged institutional bias and procedural discrepancies in the unnatural death of a young girl at her matrimonial home" के रूप में रजिस्टर किया गया था। सुनवाई के दौरान, CJI ने कहा कि दूसरी बार पोस्टमार्टम करवाने का मुद्दा पहले ही सुलझा लिया गया है।
सार्वजनिक चर्चा पर चिंता
कोर्ट ने चिंता जताई कि इस मामले पर सार्वजनिक चर्चा उचित नहीं है। CJI ने मीडिया से अनुरोध किया कि वे न तो पीड़ित परिवार के बयानों पर भरोसा करें और न ही आरोपी पक्ष के बयानों पर। बेंच ने कहा कि मामले को कानून और प्रक्रिया के अनुसार ही आगे बढ़ने दिया जाए।
आरोपों पर प्रतिक्रिया
CJI ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सुझाव दिए जा रहे हैं कि न्यायपालिका निष्पक्ष जांच नहीं कर रही है। बेंच ने विश्वास जताया कि दोनों पक्ष जांच में सहयोग करेंगे और सरकारी एजेंसियों पर कोई संदेह नहीं है।
मीडिया की भूमिका
सुनवाई के दौरान, आरोपी पक्ष के वकील ने शिकायत की कि उनके बयान अगले दिन ही मीडिया में प्रकाशित हो गए। मध्य प्रदेश सरकार के सॉलिसिटर जनरल ने पलटवार करते हुए कहा कि पूर्व जज मीडिया में मृतक को बदनाम कर रहे हैं।
सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ
SG मेहता ने कहा कि एक मृत बेटी होने से बेहतर है कि बेटी तलाकशुदा हो। कोर्ट ने इस बात को रिकॉर्ड किया कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, दूसरा पोस्टमार्टम पहले ही किया जा चुका है।
जांच CBI को सौंपने की संभावना
कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की सिफारिश पर जांच को CBI को सौंपने पर विचार किया जा रहा है। बेंच ने पीड़ित और आरोपी परिवारों से अपील की कि वे सार्वजनिक बयान देने से बचें।
सार्वजनिक बयानबाज़ी से बचने की अपील
कोर्ट ने मीडिया से भी अनुरोध किया कि वे संभावित गवाहों के बयानों को रिकॉर्ड न करें, क्योंकि इससे जांच प्रभावित हो सकती है। बेंच ने जनता से भी अपील की कि वे अटकलें लगाने से बचें और जांच एजेंसी पर भरोसा रखें।
कोर्ट की अंतिम टिप्पणियाँ
सुनवाई समाप्त करने से पहले, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणियों को आरोपों की मेरिट पर नहीं माना जाना चाहिए। बेंच ने कहा कि मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच करना पूरी तरह से जांच एजेंसी का कार्य है।