सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी के बागी विधायकों की सदस्यता रद्द करने की याचिका पर सुनवाई से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया। इस याचिका में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी और कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम सहित पार्टी के 10 बागी विधायकों की सदस्यता को दल-बदल विरोधी कानून के तहत रद्द करने की मांग की गई थी। अदालत ने याचिकाकर्ता को इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख करने का निर्देश दिया।
कलकत्ता हाईकोर्ट जाने का निर्देश
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता के लिए उचित कानूनी विकल्प कलकत्ता हाईकोर्ट जाना है। पीठ ने उन्हें वहां उचित याचिका दाखिल करने की अनुमति दी। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि इस मामले को शीघ्र सुनवाई के लिए खंडपीठ के समक्ष रखा जाए।
पांच महीने से लंबित याचिकाएं
सुनवाई के दौरान शोभनदेव चट्टोपाध्याय के वकील ने अदालत को बताया कि विधायकों की सदस्यता रद्द करने की याचिकाएं 8 जुलाई को दायर की गई थीं, लेकिन लगभग पांच महीने बीत जाने के बावजूद उन पर कोई निर्णय नहीं हुआ है। वकील ने तर्क किया कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट के पहले दिए गए निर्देशों के दायरे में आता है।
सदस्यता रद्द करने की मांग
शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने अपनी याचिका में संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत ऋतब्रत बनर्जी, फिरहाद हकीम और अन्य आठ विधायकों की सदस्यता रद्द करने का निर्देश देने की मांग की थी। याचिका में विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र बोस के खिलाफ भी निर्देश देने की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट की पूर्व की टिप्पणी
28 सितंबर को, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और अन्य न्यायाधीशों की पीठ ने पहले याचिका का निपटारा करते हुए उम्मीद जताई थी कि विधानसभा अध्यक्ष तीन महीने के भीतर विधायकों की सदस्यता रद्द करने से संबंधित कार्यवाही पर निर्णय लेंगे। हालांकि, जब कोई निर्णय नहीं आया, तो शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने फिर से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
किस विधायकों पर कार्रवाई की मांग
ऋतब्रत बनर्जी और फिरहाद हकीम के अलावा जिन विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग की गई है, उनमें संदीपन साहा, अरूप रॉय, शिउली साहा, अखरुज्जमां, सबीना यास्मीन, रथिन घोष, बिप्लब मित्रा और जावेद अहमद खान शामिल हैं। यह मामला तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे आंतरिक विवाद से संबंधित है।