सुप्रीम कोर्ट ने छात्र विरोध प्रदर्शनों पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
हाल ही में छात्रों द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कथित ज्यादतियों पर चल रही बहस के बीच, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि केवल विरोध-प्रदर्शन होने के कारण लाठीचार्ज नहीं किया जा सकता। भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह टिप्पणी तब की जब विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग के मामलों से संबंधित नई याचिकाओं का उल्लेख किया गया। इनमें से एक याचिका छात्रों के एक समूह ने दायर की है, जिन्होंने आरोप लगाया है कि उनके साथ विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा की गई।
लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अनुशासन की आवश्यकता
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "संविधान के तहत शांतिपूर्ण और कानूनी विरोध-प्रदर्शन का अधिकार पूरी तरह से सुरक्षित है। जब तक विरोध-प्रदर्शन शांतिपूर्ण है, तब तक केवल इसके होने के कारण ज्यादती नहीं की जा सकती। यदि ज्यादती हुई है, तो इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। यह केवल दिल्ली का मामला नहीं है, बल्कि पूरे देश में पुलिस प्रोटोकॉल में एकरूपता आवश्यक है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अनुशासन महत्वपूर्ण है।"
याचिकाओं में गंभीर आरोप
अदालत में दायर याचिकाओं में छात्रों के एक समूह ने आरोप लगाया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन पर बर्बरता से हमला किया। इसके अलावा, एक चौंकाने वाली याचिका में यह दावा किया गया है कि बिहार के सिवान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस ने AK-47 राइफलों का इस्तेमाल किया। कोर्ट ने इन गंभीर आरोपों को ध्यान में रखते हुए कहा कि पुलिस द्वारा बल प्रयोग के आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
पुलिसकर्मियों और छात्रों की सुरक्षा
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील को भी कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति दी। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि छात्र या पुलिसकर्मी, दोनों की चोटें अदालत के लिए समान चिंता का विषय हैं। उन्होंने राज्य सरकारों की तैयारियों पर सवाल उठाते हुए कहा, "किसी व्यक्ति को चोट लगना, चाहे वह पुलिसकर्मी हो या छात्र, समान चिंता का विषय है। हम राज्यों से यह पूछ सकते हैं कि ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए पुलिसकर्मियों को सुरक्षा उपकरण क्यों नहीं मुहैया कराए गए?"