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सुप्रीम कोर्ट ने कपूर परिवार के विवाद को महाभारत से जोड़ा

सुप्रीम कोर्ट ने कपूर परिवार के 30,000 करोड़ रुपये के संपत्ति विवाद को महाभारत से भी बड़ा बताया है। न्यायमूर्ति जे बी परदीवाला ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि यह विवाद महाभारत के युद्ध की तुलना में अधिक जटिल है। रानी कपूर ने एक नई याचिका दायर की है जिसमें उन्होंने आरके फैमिली ट्रस्ट के कार्यों में हस्तक्षेप रोकने की मांग की है। इस मामले की अगली सुनवाई 14 मई को होगी। जानें इस जटिल विवाद के बारे में और क्या कुछ नया सामने आया है।
 

महाभारत की तुलना में बड़ा विवाद

सुप्रीम कोर्ट ने कपूर परिवार की 30,000 करोड़ रुपये की संपत्ति से जुड़े विवाद को महाभारत के युद्ध से भी बड़ा बताया। न्यायमूर्ति जे बी परदीवाला ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि यह विवाद महाभारत के युद्ध की तुलना में भी अधिक जटिल है। यह टिप्पणी तब आई जब अदालत दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की माता रानी कपूर द्वारा दायर एक नई याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरके फैमिली ट्रस्ट से संबंधित कार्यों को रोकने की मांग की गई थी।


इस बीच, पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व में मध्यस्थता की प्रक्रिया जारी है। न्यायमूर्ति परदीवाला ने 12 मई को रानी कपूर द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा, "हम एक ऐसे क्षेत्र में प्रवेश कर चुके हैं जहां महाभारत भी छोटा लगेगा। हम इसकी जांच करेंगे।"


मामले की अगली सुनवाई

अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 14 मई को निर्धारित की है। यह नया मुकदमा तब सामने आया है जब 7 मई को सुप्रीम कोर्ट ने रानी कपूर और दिवंगत व्यवसायी की तीसरी पत्नी प्रिया सचदेव कपूर के बीच बढ़ते विवाद को सुलझाने के लिए डी वाई चंद्रचूड़ को मध्यस्थ नियुक्त किया था।


नई याचिका का विवरण

रानी कपूर ने अपनी नई याचिका में मध्यस्थता की प्रक्रिया समाप्त होने तक प्रिया सचदेव कपूर और अन्य प्रतिवादियों को "आरके फैमिली ट्रस्ट" के कार्यों में हस्तक्षेप करने से रोकने की मांग की है। उन्होंने 18 मई को होने वाली बोर्ड बैठक पर रोक लगाने की भी मांग की है, जो विवादित संपत्ति के एक बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखती है। याचिका में कहा गया है कि प्रस्तावित बैठक का उद्देश्य बोर्ड में अतिरिक्त निदेशकों की नियुक्ति करना था। रानी कपूर के वकील ने अदालत को बताया कि मध्यस्थता की प्रक्रिया के बावजूद, इन घटनाक्रमों से परिवार से जुड़ी संस्थाओं के नियंत्रण में बदलाव आ सकता है।