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सुप्रीम कोर्ट ने NCERT की किताब पर लगाया प्रतिबंध, न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर अध्याय विवादित

सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी की सामाजिक विज्ञान की किताब पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिसमें 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' शीर्षक का अध्याय था। न्यायालय ने इसे गहरी साजिश करार दिया और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया। केंद्र ने इस मामले में बिना शर्त माफी मांगी है। जानें इस विवाद के पीछे की कहानी और न्यायपालिका के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में।
 

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी की सामाजिक विज्ञान की किताब पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है, जिसमें 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' शीर्षक का एक अध्याय शामिल था। न्यायालय ने इसे "गहरी साजिश" करार देते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव और एनसीईआरटी के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी को नोटिस जारी किया है।


केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि 'ज्यूडिशियरी करप्शन' पर अध्याय के ड्राफ्ट में शामिल लोग यूजीसी या किसी अन्य मंत्रालय के साथ कार्य नहीं करेंगे। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बिना शर्त माफी मांगी, जबकि चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि मीडिया में इस नोटिस में माफी का कोई उल्लेख नहीं है।


CJI का बयान

जब सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि 32 किताबें बिक चुकी थीं लेकिन अब उन्हें वापस ले लिया गया है, तो CJI ने इसे जानबूझकर किया गया कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह एक गहरी साजिश है, जिससे पूरी शिक्षण समुदाय को प्रभावित किया जाएगा।


NCERT की किताब में विवाद

NCERT की सोशल साइंस किताब में 'ज्यूडिशियल करप्शन' अध्याय में बताया गया है कि भ्रष्टाचार, केसों का बड़ा बैकलॉग, और जजों की कमी न्यायपालिका के सामने प्रमुख चुनौतियाँ हैं। किताब में यह भी कहा गया है कि जज एक कोड ऑफ कंडक्ट से बंधे होते हैं, जो उनके व्यवहार को नियंत्रित करता है।


पेंडिंग केसों की संख्या

इस किताब में सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग केसों की संख्या लगभग 81,000, हाई कोर्ट में 62.40 लाख और डिस्ट्रिक्ट और सबऑर्डिनेट कोर्ट में 4.70 करोड़ बताई गई है।