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सुप्रीम कोर्ट की चिंता: न्यायपालिका पर विवादास्पद पाठ्यक्रम सामग्री

सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा आठ की किताब में न्यायपालिका से संबंधित भ्रष्टाचार के खंड को लेकर गंभीर चिंताएँ व्यक्त की हैं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एनसीआरटी को फटकार लगाते हुए कहा कि यह समाज में भ्रम पैदा कर सकता है। उन्होंने इस मुद्दे पर सॉलिसिटर जनरल से स्पष्टीकरण मांगा और कहा कि यह न्यायपालिका को बदनाम करने की एक सोची-समझी साजिश है। शिक्षा मंत्री ने भी इस पर खेद जताया और कार्रवाई का आश्वासन दिया। जानें पूरी कहानी में क्या हुआ कोर्ट रूम में।
 

न्यायपालिका की स्थिति पर गंभीर चिंता

आज न्यायपालिका की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की जा रही है। जब यह पुस्तक बाजार और सोशल मीडिया पर उपलब्ध है, तो बाद में इसे वापस लेना कितना प्रभावी होगा? यदि शिक्षकों और छात्रों को यह सिखाया जाता है कि न्यायपालिका भ्रष्ट है, तो इससे समाज में भ्रम और गलत संदेश फैल सकता है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने एनसीआरटी को कोर्ट में फटकार लगाई है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब कक्षा आठ की किताब में न्यायपालिका से संबंधित भ्रष्टाचार का एक खंड जोड़ा गया। 26 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान लिया। इस दौरान सीजीआई सूर्यकांत काफी नाराज दिखे। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने एनसीआरटी की गलती के लिए माफी मांगी, लेकिन सीजीआई इससे संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने इसे न्यायपालिका को बदनाम करने की एक सोची-समझी साजिश बताया।


प्रकाशन की वापसी का प्रभाव

चीफ जस्टिस ने सवाल उठाया कि जब यह किताब पहले से ही उपलब्ध है, तो इसे वापस लेना कैसे प्रभावी होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि छात्रों को यह सिखाया जाएगा कि न्यायपालिका भ्रष्ट है, तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा। सुनवाई के दौरान सीजीआई ने यूजीसी पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि 24 फरवरी 2026 को इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक लेख के बाद सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल से यह जानने को कहा गया कि क्या एनसीआरटी को ऐसी किताब जारी करने के लिए कहा गया था।


कोर्ट की कार्रवाई और टिप्पणियाँ

कोर्ट ने कहा कि जिस अध्याय पर चर्चा की गई, उसकी बैठकों के मिनट्स अगली सुनवाई में पेश किए जाएं। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि संबंधित अध्याय में न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतों की संख्या को इस तरह प्रस्तुत किया गया है, जैसे उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई हो। कोर्ट ने कहा कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणियों को संदर्भ से हटकर इस तरह पेश किया गया, मानो उन्होंने भ्रष्टाचार के अस्तित्व को स्वीकार किया हो।


पुस्तक का व्यापक प्रभाव

न्यायालय ने कहा कि इस पुस्तक का प्रभाव केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनके अभिभावकों, समाज और अगली पीढ़ी तक भी पहुंचेगा। पीठ ने यह भी कहा कि अध्याय में न्यायपालिका के ऐतिहासिक और सराहनीय कदमों का कोई उल्लेख नहीं है। कोर्ट ने कहा, 'यह मौन विशेष रूप से आपत्तिजनक है, जबकि इस न्यायालय ने अनेक उच्चाधिकारियों को भ्रष्ट आचरण के लिए कठोर फटकार लगाई है।'


कोर्ट रूम में क्या हुआ?

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि एनसीईआरटी ने किताब में गलती के लिए माफी मांगी है। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा, 'एनसीईआरटी की प्रेस विज्ञप्ति में क्षमा का कोई उल्लेख नहीं है। जब मैंने सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल से जानकारी मांगी थी, तब एनसीआरटी ने चैप्टर का बचाव किया था। सॉलिसिटर जनरल ने आश्वासन दिया कि जिन लोगों ने ऐसा किया, उन्हें भविष्य में एनसीईआरटी या किसी मंत्रालय से संबद्ध नहीं रखा जाएगा। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि यह बहुत हल्का परिणाम होगा।'


शिक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया

सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने खेद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि एनसीईआरटी से संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और ऐसी स्थिति फिर न बने, इसका ध्यान रखा जाएगा। 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' वाले चैप्टर को तैयार करने वाली समिति के सदस्यों पर कार्रवाई की जाएगी। जैसे ही यह जानकारी मिली, किताबों को वापस करवाया गया। हमने शिक्षा सचिव से यह पता लगाने को कहा है कि किसने इस गैर-जिम्मेदाराना चैप्टर को जोड़ा है। एनसीईआरटी भी इस गलती के जिम्मेदार लोगों की पहचान कर रही है।