सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: सरकारी नौकरी केवल योग्य अभ्यर्थियों के लिए
सरकारी नौकरी की योग्यता पर सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट संदेश
नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सरकारी नौकरियों का आवंटन केवल उन अभ्यर्थियों को किया जाना चाहिए जो निर्धारित योग्यता को पूरा करते हैं। यदि किसी अधिक योग्य व्यक्ति को कम योग्यता वाले पद पर नियुक्त किया जाता है, तो यह वास्तव में योग्य अभ्यर्थियों के अवसरों का हनन है।
सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के एक आदेश को रद्द करते हुए यह निर्णय सुनाया, जिसमें एक अस्थायी बैंक सहायक की बहाली का निर्देश दिया गया था। न्यायालय ने कहा कि हाई कोर्ट ने इस तथ्य को नजरअंदाज किया कि उस कर्मचारी ने अपनी स्नातक योग्यता छिपाई थी और 10वीं कक्षा तक की योग्यता वाले अभ्यर्थियों के लिए निर्धारित पद पर नियुक्ति प्राप्त की थी।
न्यायालय ने कहा, 'सरकारी नौकरी केवल उन अभ्यर्थियों को दी जानी चाहिए जो निर्धारित योग्यता के अनुसार पात्र हैं। यदि कोई पद कम शैक्षणिक योग्यता वाले अभ्यर्थियों के लिए निर्धारित है, तो अधिक योग्य व्यक्ति को उस पद पर नियुक्त करना, वास्तव में योग्य और हकदार अभ्यर्थियों को अवसर से वंचित करना है।'
सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए बैंक के उस निर्णय को सही ठहराया, जिसमें उक्त कर्मचारी को नौकरी से निकाला गया था। न्यायालय ने कहा कि योग्यता की ऊपरी सीमा निर्धारित करने का तर्क उचित और न्यायसंगत है, ताकि उन लोगों को रोजगार के अवसर मिल सकें जो जीवन की परिस्थितियों के कारण आगे नहीं पढ़ पाए।
न्यायालय ने यह भी कहा, 'सरकार के लिए आदर्श नियोक्ता के रूप में यह उचित है कि वह कुछ श्रेणियों के पद आरक्षित रखे, ताकि कम योग्यता वाले अभ्यर्थियों को अधिक योग्य उम्मीदवारों से मुकाबला करने के लिए मजबूर न होना पड़े, जिनके चयन की संभावना बहुत कम होती है। अदालतों ने हमेशा इस प्रकार की नीतियों को सही ठहराया है।'