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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: पैदल चलने का अधिकार अब मौलिक अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पैदल चलने का अधिकार मौलिक अधिकार घोषित किया है। यह निर्णय एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना के मामले में आया, जिसमें एक पांच साल का बच्चा अपनी जान गंवा बैठा। कोर्ट ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित फुटपाथ का निर्माण करे। इस फैसले ने न केवल सड़क सुरक्षा के मुद्दे को उजागर किया है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया है कि पैदल चलने वालों के अधिकारों की रक्षा की जाए। जानें इस महत्वपूर्ण निर्णय के पीछे की कहानी और इसके व्यापक प्रभाव को।
 

एक दर्दनाक घटना

सुबह का समय था, जब हल्की ठंडक और साफ आसमान के बीच एक पांच साल का बच्चा अपने पिता का हाथ थामे, स्कूल के लिए तेजी से बढ़ रहा था। स्कूल का गेट नजदीक था, लेकिन वहां तक पहुँचने के लिए कोई फुटपाथ नहीं था। सड़क पर गाड़ियों की बेतरतीब रफ्तार ने पैदल चलने वालों के लिए कोई सुरक्षित स्थान नहीं छोड़ा। अचानक, एक जोरदार झटका लगा और पिता के हाथ से बच्चे की उंगलियाँ छूट गईं। पल भर में सब कुछ खत्म हो गया। स्कूल का गेट चंद कदमों की दूरी पर रह गया, और एक पिता की दुनिया हमेशा के लिए उजड़ गई।


हमारी सड़कों पर या तो फुटपाथ मौजूद नहीं हैं, और यदि हैं, तो वहां भी सुरक्षा का कोई भरोसा नहीं है। फुटपाथ की अनुपस्थिति से पैदल चलने वालों का अधिकार भी खतरे में है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है और अब फुटपाथ पर चलना मौलिक अधिकार बन गया है।


सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

19 जून को सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया। जस्टिस पी एस नरसिम्हा ने कहा कि जब भी सड़क का निर्माण किया जाए, तो सरकार और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित फुटपाथ का निर्माण करें और उसका रखरखाव करें। ऐसे फुटपाथ पर स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए कि यह पैदल चलने वालों के लिए है, और वहां गाड़ियों का चलना मना होना चाहिए।


कोर्ट ने एक सड़क दुर्घटना के मामले में यह निर्णय लिया, जिसमें एक बच्चा अपने पिता के साथ स्कूल जा रहा था और एक टैंकर ने उसे टक्कर मार दी। बच्चे के पिता ने ₹25 लाख का मुआवजा मांगा था, लेकिन मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने उन्हें ₹8,20,000 का मुआवजा दिया, जिसे हाई कोर्ट ने घटाकर ₹4,70,000 कर दिया।


पैदल चलने का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के निर्णय को रद्द करते हुए पीड़ित पिता को ₹11,44,628 का मुआवजा देने का आदेश दिया और कहा कि यह राशि दो महीने के भीतर दी जाए। बेंच ने कहा कि सुरक्षित और निश्चिंत होकर पैदल चलना मानव की बुनियादी गतिविधियों में से एक है। यह सीधे तौर पर जीवन के अधिकार से जुड़ा है। संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (d) के तहत नागरिकों को स्वतंत्र रूप से घूमने का अधिकार दिया गया है, और पैदल चलना इसी अधिकार का हिस्सा है।


कोर्ट ने यह भी कहा कि समय के साथ विकास के कारण पैदल चलने वालों को नजरअंदाज किया गया है। चौड़ी सड़कों और एक्सप्रेसवे को विकास का प्रतीक बना दिया गया है, लेकिन फुटपाथ पर चलने वाले लोगों की सुरक्षा का ध्यान नहीं रखा गया।


फुटपाथ की स्थिति

2013 में सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टिट्यूट ने दिल्ली की 14 किलोमीटर लंबी सड़कों का सर्वेक्षण किया था। इसमें पाया गया कि 27 प्रतिशत हिस्से में फुटपाथ नहीं थे। केवल 55 प्रतिशत सड़कों पर मानकों के अनुसार फुटपाथ मिले। इस लंबे हिस्से में यदि कोई फुटपाथ पर चले, तो उसे हर 100 मीटर पर लगभग 28 बार ऊपर या नीचे उतरना पड़ता था।


दिल्ली कैंट में रहने वाली नलिनी भार्गव ने बताया कि वह फुटपाथ पर नहीं चलती क्योंकि घुटनों में दर्द रहता है और बार-बार चढ़ना उतरना पड़ता है। इसलिए, सड़क पर चलना उनकी मजबूरी बन जाती है।


संविधान में पैदल चलने का अधिकार

यह मामला एक पांच साल के बच्चे की सड़क दुर्घटना से जुड़ा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पैदल चलने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (d) के तहत स्वतंत्र रूप से घूमने के अधिकार से संबंधित है।


शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि सड़क पर पहला अधिकार पैदल चलने वालों का है। हालांकि, देश के अधिकांश शहरों में सड़कों और पुलों का निर्माण इस तरह से हुआ है कि पैदल चलने वाले प्राथमिकता में नहीं हैं। कई शहरों में फुटपाथ गायब हैं या अतिक्रमण की चपेट में हैं।


सरकार की जिम्मेदारी

अदालत ने सरकार से पैदल चलने के अधिकार को मान्यता देने के लिए कानून बनाने और स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी तय करने को कहा है। जहां सड़क है, वहां फुटपाथ भी होना चाहिए और उसका रखरखाव भी किया जाना चाहिए। यदि कोई विभाग अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का यह महत्वपूर्ण हिस्सा है कि यदि किसी नागरिक के इस अधिकार का उल्लंघन होता है, तो वह कानूनी कार्रवाई और मुआवजे की मांग कर सकता है। इससे जिम्मेदार लोग सचेत रहेंगे।