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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: NEET पेपर लीक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने NEET पेपर लीक से जुड़े प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया है, जिससे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को राहत मिली है। इस फैसले के बाद CJP ने 5 सितंबर को प्रस्तावित प्रदर्शन को वापस ले लिया। CJI सूर्यकांत की टिप्पणी के बाद शुरू हुआ यह आंदोलन अब छात्र राजनीति और न्यायपालिका के रिश्तों पर नई बहस का कारण बन सकता है। जानें इस महत्वपूर्ण फैसले के पीछे की कहानी और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं।
 

सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय


सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसका नेतृत्व चीफ जस्टिस सूर्यकांत कर रहे थे, ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े एक विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मंगलवार को अदालत ने NEET पेपर लीक से संबंधित प्रदर्शनों में शामिल सभी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने का आदेश दिया। इसके साथ ही, केंद्र सरकार की एक अन्य प्रमुख मांग को भी मान लिया गया, जिसके बाद CJP ने 5 सितंबर को होने वाले अपने प्रदर्शन को वापस लेने का निर्णय लिया।


मामले की पृष्ठभूमि

कॉकरोच जनता पार्टी की स्थापना मई 2026 में हुई थी, जब CJI सूर्यकांत ने एक सुनवाई के दौरान कुछ लोगों को फर्जी डिग्री रखने के लिए 'कॉकरोच' कहा था। इस टिप्पणी के बाद, सोशल मीडिया पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' नामक आंदोलन शुरू हुआ, जो बाद में NEET परीक्षा विवाद के दौरान छात्र आंदोलन में बदल गया।


प्रदर्शन और मांगें

जुलाई में CJP के नेतृत्व में जंतर-मंतर और संसद मार्ग पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई और FIR दर्ज होने से स्थिति और बिगड़ गई। प्रदर्शनकारियों ने तीन मुख्य मांगें रखी थीं: मुआवजा, FIR का वापस लेना, और भविष्य में कोई नई FIR न दर्ज होना।


सुप्रीम कोर्ट का आदेश

मंगलवार को CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने सुनवाई की। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जुलाई 20 से 25 के बीच दर्ज FIR को वापस लेने के लिए तैयार है। इसके साथ ही, NEET विवाद में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने का आश्वासन भी दिया गया।


अदालत ने इन FIR को रद्द करने का आदेश दिया। CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने अदालत में कहा कि केंद्र के सकारात्मक आश्वासन और अदालत के आदेश को देखते हुए पार्टी 5 सितंबर का प्रस्तावित मार्च वापस ले रही है।


राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

इस मामले पर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा हो रही है। 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम को लेकर पहले से ही राजनीतिक तंज चल रहा था। विपक्षी दलों और कुछ छात्र संगठनों ने CJI की टिप्पणी को युवाओं के अपमान से जोड़ा, जबकि CJI ने स्पष्ट किया कि उनका इशारा फर्जी डिग्री वालों की ओर था।


CJI सूर्यकांत ने कहा कि यदि दोनों पक्ष सद्भावना से काम करें, तो किसी भी मुद्दे का समाधान संभव है। अदालत के इस रुख से मामला शांत होने की दिशा में बढ़ता दिख रहा है।


यह फैसला कानूनी और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। CJP जैसे अनौपचारिक आंदोलन को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने से छात्र राजनीति और न्यायपालिका के रिश्तों पर नई बहस छिड़ने की संभावना है। अब देखना होगा कि मुआवजे और FIR वापसी की प्रक्रिया कितनी सुचारू रूप से पूरी होती है।