सुप्रीम कोर्ट का आदेश: उच्च न्यायालयों को तीन महीने में निर्णय सुनाने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने सभी उच्च न्यायालयों को आदेश दिया है कि वे सुरक्षित रखे गए मामलों का निर्णय तीन महीने के भीतर सुनाएं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में त्वरित निर्णय की आवश्यकता पर जोर दिया। जमानत आवेदनों पर निर्णय उसी दिन सुनाने का निर्देश दिया गया है। यह आदेश न्याय की मांग करने वालों के लिए समय पर निर्णय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जारी किया गया है।
May 29, 2026, 12:18 IST
सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सभी उच्च न्यायालयों को आदेश दिया है कि वे सुरक्षित रखे गए मामलों का निर्णय तीन महीने के भीतर सुनाएं। कोर्ट ने यह निर्णय इसलिए लिया क्योंकि देरी से याचिकाकर्ताओं को गंभीर नुकसान होता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में त्वरित निर्णय की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जमानत आवेदनों पर निर्णय उसी दिन सुनाया जाना चाहिए, और यदि निर्णय सुरक्षित रखा जाता है, तो उसे अगले दिन सुनाया और अपलोड किया जाना चाहिए। इसके अलावा, जमानत का आदेश जेल अधिकारियों को तुरंत सूचित किया जाना चाहिए।
जमानत आदेशों की त्वरित प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने कई निर्देश जारी करते हुए कहा कि जमानत या सजा निलंबन के आदेश सुनाए जाने के तुरंत बाद जेल अधिकारियों को सूचित किया जाना चाहिए। विचाराधीन या दोषी व्यक्ति को उसी दिन या अधिकतम अगले दिन रिहा किया जाना चाहिए। यह निर्देश संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत जारी किए गए हैं। न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सभी उच्च न्यायालयों को लंबित मामलों पर तीन महीने के भीतर निर्णय सुनाने का आदेश दिया है।
निर्णयों की समयबद्धता पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जमानत आदेश उसी दिन सुनाया जाना चाहिए, या यदि निर्णय में देरी होती है तो अगले दिन सुनाया जाना चाहिए। निचली अदालतों को नियमित जमानत आदेशों के संबंध में तुरंत सूचना देने का निर्देश दिया गया है। जमानत प्राप्त विचाराधीन कैदियों को आवश्यक औपचारिकताओं के अधीन उसी दिन रिहा किया जाना चाहिए। सभी निर्णयों को सुनाए जाने के 24 घंटों के भीतर उच्च न्यायालय की वेबसाइटों पर अपलोड किया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि जिस दिन निर्णय का मुख्य भाग सुनाया जाता है, वही निर्णय की तारीख मानी जाएगी।
न्याय की मांग करने वालों के लिए समय पर निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उच्च न्यायालय प्राथमिक संस्थाएं हैं जहां हजारों लोग न्याय की मांग करते हैं, और निर्णयों का समय पर सुनाया जाना आवश्यक है। इन निर्देशों का उद्देश्य किसी भी न्यायाधीश या संस्था पर कोई आरोप लगाना नहीं है। यह आदेश झारखंड उच्च न्यायालय में निर्णयों में देरी से संबंधित एक मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी किया गया है।