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सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली पुलिस का पेलेट गन विवाद पर नया मोड़

संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन के उपयोग को लेकर उठे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा कानूनी प्रावधानों में बदलाव किए बिना पेलेट गन पर प्रतिबंध लगाने की मांग को खारिज कर दिया है। वहीं, दिल्ली पुलिस ने CJP के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज 13 एफआईआर वापस लेने का निर्णय लिया है। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
 

पेलेट गन के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

संसद में मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन के उपयोग को लेकर उठे विवाद ने अब कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर नया मोड़ ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा कानूनी ढांचे में बदलाव किए बिना पेलेट गन के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने राहत देते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज 13 एफआईआर वापस लेने का निर्णय लिया है। हालांकि, हिंसा में शामिल आरोपियों और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को इस राहत से बाहर रखा गया है.


सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और निर्देश

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने पेलेट गन पर रोक लगाने की मांग वाली याचिकाओं की सुनवाई के दौरान कहा कि यदि याचिकाकर्ता इन हथियारों को पूरी तरह समाप्त करना चाहते हैं, तो उन्हें उन कानूनी प्रावधानों को चुनौती देनी होगी जो असाधारण परिस्थितियों में भीड़ नियंत्रण के लिए इनका उपयोग करने की अनुमति देते हैं.


पुलिस के खिलाफ याचिकाएं और उनके तर्क

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी विशेष घटना में पेलेट गन के कथित दुरुपयोग की जांच करने को तैयार है। अदालत ने केंद्र सरकार और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के महानिरीक्षक को नोटिस जारी करते हुए जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए CJP प्रदर्शन के दौरान तैनात RAF जवानों के हथियारों और इस्तेमाल किए गए गोला-बारूद का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया.


याचिकाकर्ताओं के तर्क और सुरक्षा चिंताएं

पूर्व आईबी विशेष निदेशक यशोवर्धन आजाद और दो घायल युवकों की ओर से दायर याचिकाओं में धातुयुक्त पेलेट गनों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन्हें "कम घातक" हथियार माना जाता है, लेकिन निकटता से चलाए जाने पर ये आंखों सहित शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकते हैं.


संयुक्त राष्ट्र के दिशा-निर्देशों का उल्लेख

याचिकाकर्ताओं ने संयुक्त राष्ट्र के "लेस लेथल वेपन्स" संबंधी दिशा-निर्देशों का भी उल्लेख किया, जिसमें भीड़ पर धातुयुक्त पेलेट के उपयोग को आवश्यकता, आनुपातिकता और तर्कसंगतता के संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत बताया गया है.


पुलिस के मानक संचालन प्रक्रिया पर सवाल

वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने अदालत को बताया कि पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPRD) की भीड़ नियंत्रण संबंधी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) में पेलेट गन के उपयोग का उल्लेख नहीं है। हालांकि, न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि संबंधित दस्तावेज केवल एक प्रस्ताव है और मौजूदा व्यवस्था में भीड़ नियंत्रण के लिए "ग्रेडेड रिस्पॉन्स" के तहत पेलेट गन का भी प्रावधान मौजूद है.


शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का महत्व

अदालत ने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण छात्र आंदोलनों और लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों में अहिंसक तरीके अपनाए जाने चाहिए, लेकिन कई बार शांतिपूर्ण आंदोलन असामाजिक तत्वों द्वारा हिंसक रूप ले लेते हैं। ऐसी परिस्थितियों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस के पास अलग-अलग स्तर के बल प्रयोग के विकल्प होना भी आवश्यक है.


दिल्ली पुलिस का निर्णय

दिल्ली पुलिस ने CJP के संसद मार्च के बाद दर्ज 13 एफआईआर वापस लेने का निर्णय लिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह राहत केवल उन प्रदर्शनकारियों को मिलेगी जिन पर हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप नहीं हैं.


20 जुलाई की घटना का संदर्भ

20 जुलाई को हजारों प्रदर्शनकारी परीक्षा पेपर लीक, विशेष रूप से NEET-UG मामले में जवाबदेही की मांग को लेकर संसद मार्च में शामिल हुए थे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हुई, जिसके बाद पुलिस ने आंसू गैस, लाठीचार्ज और कथित तौर पर पेलेट गन का उपयोग किया.


भविष्य की संभावनाएं

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और दिल्ली पुलिस के निर्णय ने इस विवाद को केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रहने दिया है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि भीड़ नियंत्रण के नाम पर धातुयुक्त पेलेट गन का उपयोग संवैधानिक कसौटी पर कितना टिकता है और लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों में पुलिस बल प्रयोग की नई सीमाएं क्या होंगी.