सीरिया में अमेरिकी सेना की विदाई: मिडिल ईस्ट में बदलते समीकरण
अमेरिका की रणनीति में बदलाव
ईरान द्वारा अमेरिका के खिलाफ किए गए हमलों के चलते उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। ईरान ने अरब देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लगभग समाप्त कर दिया है। इस बीच, अमेरिका को मिडिल ईस्ट में एक और गंभीर झटका लगा है। यह झटका केवल सैन्य दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि रणनीतिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। सीरिया के हसाका प्रांत में स्थित कसराक एयरबेस से अमेरिका ने अपनी अंतिम टुकड़ी को हटा लिया है। भारी सैन्य काफिले के साथ सैनिक और उपकरण बेस से बाहर निकल गए हैं। जाते समय, उन हथियारों और तकनीकी संसाधनों को नष्ट कर दिया गया जिन्हें ले जाना संभव नहीं था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसे एक सुनियोजित निर्णय बताया है। लेकिन असली सवाल यह है कि अमेरिका को इस स्थिति में लाने वाला कौन है?
सीरिया की जीत और क्षेत्रीय ताकतों का उभार
यह केवल एक सैन्य ठिकाने को खाली करने की कहानी नहीं है, बल्कि मिडिल ईस्ट में शक्ति संतुलन के बदलते समीकरण की कहानी है। सीरिया ने इस कदम को अपनी बड़ी जीत के रूप में प्रस्तुत किया है और कहा है कि उसके खोए हुए क्षेत्रों पर फिर से नियंत्रण प्राप्त करना उसकी संप्रभुता की वापसी है। यह वापसी सीरिया सरकार और कुर्द लड़ाकों के बीच हुए समझौते के बाद संभव हुई है। अब जिस भूमि पर अमेरिका की लंबे समय तक उपस्थिति रही, वहां स्थानीय और क्षेत्रीय ताकतें हावी होती दिख रही हैं। यदि इस घटनाक्रम को ईरान-अमेरिका तनाव के संदर्भ में देखा जाए, तो स्थिति और भी दिलचस्प हो जाती है।
अमेरिका की नई रणनीति
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर लगातार दबाव बनाने की बातें और ईरान के साथ ढील की संभावना के दावे के बीच, ईरान इन दावों को खारिज कर रहा है। अमेरिका का सीरिया से पीछे हटना इस बात का संकेत है कि वाशिंगटन अपनी रणनीति में बदलाव कर चुका है। अमेरिका लंबे समय से आईएसआईएस के खिलाफ ऑपरेशन के नाम पर सीरिया में मौजूद था और एसडीएफ के साथ मिलकर काम कर रहा था। लेकिन अब लगभग 5700 आईएसआईएस और आतंकियों को सीरिया से इराक की जेलों में स्थानांतरित किया जा चुका है। इसका मतलब है कि अमेरिका का मुख्य मिशन लगभग समाप्त हो चुका है और ग्राउंड पर भारी सैन्य उपस्थिति की आवश्यकता कम हो गई है।
मिडिल ईस्ट में शक्ति का संतुलन
सच्चाई यह है कि सीरिया में रूस और ईरान पहले से ही मजबूत स्थिति में हैं। ऐसे में अमेरिका का पीछे हटना इन ताकतों के लिए और अधिक स्थान बनाता है। सवाल यह उठता है कि क्या अमेरिका जानबूझकर यह स्थान दे रहा है या फिर परिस्थितियों ने उसे ऐसा करने पर मजबूर कर दिया है। कसरा एयरबेस से अमेरिकी सेना की विदाई के साथ एक युग का अंत हो गया है। लेकिन मिडिल ईस्ट की राजनीति में कोई भी खाली स्थान अधिक समय तक नहीं रह सकता। वहां तुरंत कोई न कोई ताकत उस स्थान पर कब्जा कर लेती है।