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सीरियल किलर मोनू: चार महिलाओं की हत्या और दुष्कर्म का मामला

सीरियल किलर मोनू ने चार महिलाओं के साथ दुष्कर्म कर हत्या की, जिससे पूरे देश में हड़कंप मच गया। यह मामला 2010 में शुरू हुआ जब एक एमबीए छात्रा का शव मिला। पुलिस ने 15 साल बाद डीएनए के जरिए मोनू को पकड़ा। जानिए इस कुख्यात अपराध की पूरी कहानी और मोनू को मिली सजा के बारे में।
 

मोनू का कुख्यात अपराध


एक व्यक्ति ने हैवानियत की सारी सीमाएं पार करते हुए चार महिलाओं के साथ दुष्कर्म किया और उन्हें बेरहमी से हत्या कर दी। हम यहां सीरियल किलर मोनू के बारे में चर्चा कर रहे हैं।


इसकी कहानी 2010 से शुरू होती है, जब 21 वर्षीय एमबीए छात्रा नेहा अहलावत 30 जुलाई को शाम के समय अपने घर से अंग्रेजी क्लास के लिए निकली। लेकिन वह वापस नहीं लौटी। उसी रात, उसकी अर्धनग्न और खून से सनी लाश टैक्सी स्टैंड के पास झाड़ियों में मिली। उसके शरीर पर चोटों के निशान थे और गला घोंटकर हत्या की गई थी। बाद में सीएफएसएल ने उसके कपड़ों पर मौजूद वीर्य के नमूनों से दुष्कर्म की पुष्टि की। इस मामले में कोई सुराग नहीं मिला और 2020 में इसे अनसुलझा मानकर बंद कर दिया गया। लेकिन यह मामला बंद नहीं हुआ, क्योंकि उसी डीएनए के जरिए पुलिस को 15 साल बाद सच्चाई का पता लगाना था।


चंडीगढ़ के जंगलों में इसी तरह के दो और मामले सामने आए, जहां सभी महिलाओं को अकेला देखकर निशाना बनाया गया। हमलावर ने उन्हें सुनसान स्थानों पर ले जाकर हमला किया, गला घोंटा और शव को झाड़ियों में फेंक दिया। कई मामलों में हत्या के बाद दुष्कर्म के संकेत भी मिले। तीनों मामलों में एक ही व्यक्ति का डीएनए मिला।


मोनू ने चार महिलाओं के साथ एक ही पैटर्न में दुष्कर्म और हत्या की। उसने 2008 में हिमाचल प्रदेश के चंबा में एक बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और उसे नुकीले पत्थर से मारकर हत्या कर दी। हिमाचल पुलिस ने मोनू कुमार को गिरफ्तार किया, लेकिन सबूतों की कमी के कारण उसे बरी कर दिया गया। इसके बाद, 2010 में उसने एमबीए छात्रा के साथ भी ऐसा ही किया। 2022 में, उसने मलोया के जंगल में एक विवाहिता के साथ दुष्कर्म किया। फरवरी 2024 में, उसने 65 वर्षीय महिला की हत्या की और दुष्कर्म का प्रयास किया। महिला के कपड़ों पर मिले सीमन का डीएनए मोनू से मेल खा गया।


डॉक्टरों ने मोनू के सैंपल की जांच मृत विवाहिता के सैंपल से की। 6 मई 2024 को जब मोनू वापस आया, तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। शुरुआत में उसने सब कुछ नकारा, लेकिन जब पुलिस ने बताया कि उसका डीएनए तीनों मामलों से मेल खाता है, तो उसने अपनी गुनाह कबूल कर ली। उसके पास उसका मोबाइल फोन भी था, जिसकी लोकेशन ट्रैकिंग से पता चला कि वह उसी क्षेत्र में था, जहां शनीचरा देवी का शव मिला था।


अब फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मोनू को एमबीए छात्रा के दुष्कर्म और हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उस पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। मोनू पर इसी तरह के कई अन्य मामलों के आरोप भी हैं, जिनकी सुनवाई अभी अदालत में चल रही है।