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सीबीआई ने राजस्थान में म्यूल खातों के खिलाफ दर्ज की प्राथमिकी

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने राजस्थान के श्रीगंगानगर में म्यूल खातों के खिलाफ कार्रवाई की है, जिसमें 1,621 करोड़ रुपये की अवैध धनराशि का लेन-देन शामिल है। जांच में बैंक के पूर्व अधिकारियों और फर्जी कंपनियों की संलिप्तता का खुलासा हुआ है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और सीबीआई की कार्रवाई के बारे में।
 

सीबीआई की कार्रवाई

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने राजस्थान के श्रीगंगानगर में पंजाब एंड सिंध बैंक के पूर्व शाखा प्रमुखों और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ 1,621 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि के लेन-देन के लिए 'म्यूल' खातों को खोलने के आरोप में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की है। अधिकारियों ने शुक्रवार को इस मामले की जानकारी दी।


जांच की शुरुआत

सीबीआई ने अपनी प्रारंभिक जांच के आधार पर यह कार्रवाई की है। जांच में श्रीगंगानगर जिले में बैंक की राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय शाखा में 13 और मुख्य शाखा में चार ऐसे खाते पाए गए हैं, जिनके माध्यम से साइबर अपराध और अन्य धोखाधड़ी से अर्जित 1,621 करोड़ रुपये की अवैध धनराशि का लेन-देन हुआ।


आरोपियों की पहचान

इस मामले में बैंक की मुख्य शाखा के पूर्व प्रबंधक अमन आनंद और राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय शाखा के प्रमुख विकास वाधवा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा, खाते खोलने में सहायता करने वाली कंपनियों और व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है।


म्यूल खातों की परिभाषा

'म्यूल' खाते वे बैंक खाते होते हैं, जिनका उपयोग अपराधी अवैध धन प्राप्त करने, उसे स्थानांतरित करने या वैध बनाने के लिए करते हैं, चाहे खाताधारक की जानकारी हो या न हो।


फर्जी कंपनियों का खुलासा

सीबीआई ने प्राथमिकी में आरोप लगाया है कि बैंक अधिकारियों ने फर्जी कंपनियों के नाम पर इन चालू खातों को खोलने में मदद की। उन्होंने झूठे सत्यापन के लिए स्थल का दौरा करने की रिपोर्ट तैयार की।


जाली कंपनियों का मामला

जांच में यह भी सामने आया कि जिन 17 कंपनियों के नाम पर ये चालू खाते खोले गए थे, वे सभी वास्तविकता में अस्तित्व में नहीं थीं। इन कंपनियों को केवल जाली दस्तावेजों के आधार पर खातों को खोलने और लेन-देन करने के लिए स्थापित किया गया था।