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सीबीआई ने कोलकाता में खनन कंपनी के खिलाफ छापेमारी की

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने कोलकाता में एक खनन कंपनी के खिलाफ छापेमारी की, जिसमें आरोप है कि कंपनी ने यूको बैंक को 7.25 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया। जांच के दौरान, सीबीआई ने विभिन्न स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया और दस्तावेजी साक्ष्य एकत्र किए। यह मामला पहले से ही बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर चल रही जांच से जुड़ा हुआ है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और सीबीआई की कार्रवाई के पीछे की कहानी।
 

सीबीआई की कार्रवाई

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एक खनन कंपनी द्वारा ऋण धोखाधड़ी के आरोप में यूको बैंक को 7.25 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने के मामले में बृहस्पतिवार को कोलकाता के विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की।


अधिकारियों के अनुसार, न्यू अलीपुर क्षेत्र में एक व्यवसायी के घर और न्यू टाउन में अन्य स्थानों पर छापेमारी की गई। सीबीआई की पांच टीमों ने न्यू टाउन के अलावा, न्यू अलीपुर में भूखंड संख्या- 28 पर स्थित एक बहुमंजिला आवासीय परिसर की पांचवीं मंजिल पर भी तलाशी अभियान चलाया।


यह परिसर स्वाति माइनिंग कंपनी के प्रवर्तकों और जमानतदारों अमित कुमार केजरीवाल और सरवन कुमार केजरीवाल से संबंधित माना जा रहा है। एक अधिकारी ने बताया, 'इस समन्वित अभियान का उद्देश्य जांच से जुड़े दस्तावेज और अन्य सामग्री एकत्र करना है।'


यूको बैंक की शिकायत

सीबीआई ने यूको बैंक की शिकायत पर 30 दिसंबर, 2025 को कंपनी, उसके निदेशकों गिरिजा ठाकुर और सम्राट चक्रवर्ती, और प्रवर्तकों तथा जमानतदारों अमित कुमार केजरीवाल और सरवन कुमार केजरीवाल के खिलाफ एक नया मामला दर्ज किया था। यह कंपनी पहले से ही बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर दर्ज एक अन्य बैंक धोखाधड़ी मामले में सीबीआई जांच का सामना कर रही है।


यूको बैंक द्वारा दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने बैंक को 7.25 करोड़ रुपये का गलत नुकसान पहुंचाया, जो कि एनपीए (गैर निष्पादित परिसंपत्ति) की तारीख - 30 जून, 2019 को बैंक के खाते में बकाया राशि थी।


शिकायत के अनुसार, कंपनी लौह अयस्क और अन्य खनिजों के थोक व्यापार में संलग्न थी और 2004 से यूको बैंक से विभिन्न ऋण सुविधाएं ले रही थी। आरोप है कि आरोपियों ने कार्यशील पूंजी सुविधा का दुरुपयोग किया और राशि को ऐसे पक्षों को हस्तांतरित किया जिन्हें विविध लेनदारों के रूप में वर्गीकृत किया गया था, जो वास्तव में लेनदार नहीं थे।


तहरीर में यह भी आरोप लगाया गया है कि 'इसने समूह की कंपनियों या उक्त कर्जदार से जुड़ी कंपनियों को भी भारी मात्रा में धन हस्तांतरित किया।' अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी के दौरान किसी भी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए केंद्रीय बलों के जवान सीबीआई अधिकारियों के साथ मौजूद थे।