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सीबीआई की बड़ी कार्रवाई: महिला आईआरएस अधिकारी गिरफ्तार, करोड़ों की रिश्वत का खुलासा

साल 2026 के पहले दिन, सीबीआई ने झांसी में महिला आईआरएस अधिकारी प्रभा भंडारी को 1.5 करोड़ रुपये की रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तार किया। उनके फोन कॉल में 'पैसे को गोल्ड में बदलने' का कोड वर्ड उनकी गिरफ्तारी का मुख्य कारण बना। छापेमारी में करोड़ों रुपये का सोना, नकद और संपत्तियों के दस्तावेज बरामद हुए हैं। इस कार्रवाई ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। जानें इस मामले की पूरी कहानी और सीबीआई की कार्रवाई के पीछे की सच्चाई।
 

सीबीआई की सर्जिकल स्ट्राइक


साल 2026 के पहले दिन, सीबीआई ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। झांसी में तैनात महिला आईआरएस अधिकारी प्रभा भंडारी को 1.5 करोड़ रुपये की रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उनके फोन कॉल में 'पैसे को गोल्ड में बदलने' का कोड वर्ड उनकी गिरफ्तारी का मुख्य कारण बना। छापेमारी के दौरान करोड़ों रुपये का सोना, लगभग 2 करोड़ रुपये नकद और कई संपत्तियों के दस्तावेज बरामद हुए हैं। जानिए सीबीआई ने इस अधिकारी को कैसे पकड़ा।


महिला अधिकारी की गिरफ्तारी

सीबीआई की कार्रवाई: 'मैडम, पैसा मिल गया है... ठीक है, इसे गोल्ड में बदलकर देना।' साल के पहले दिन, 70 लाख रुपये की रिश्वत लेने वाली महिला आईआरएस अधिकारी सीबीआई के जाल में फंस गई। झांसी रेंज की सीजीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी को सीबीआई ने गिरफ्तार किया है। एक रिकॉर्डेड फोन कॉल में उन्होंने सुपरिटेंडेंट्स को 70 लाख रुपये सोने में बदलने का निर्देश दिया था। इस कॉल के ट्रेस होने के बाद, सीबीआई ने झांसी, दिल्ली और ग्वालियर में छापेमारी की, जिसमें भारी मात्रा में कैश, सोना-चांदी और लगभग 9 करोड़ रुपये की संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं। इस मामले में दो सुपरिटेंडेंट, एक फर्म मालिक और एक वकील भी गिरफ्तार हुए हैं।


एक कॉल ने खोली पोल

इस साजिश का पर्दाफाश एक कॉल रिकॉर्डिंग के जरिए हुआ। सीबीआई काफी समय से इस सिंडिकेट पर नजर रख रही थी। एक फर्म मालिक से टैक्स चोरी और केस रफा-दफा करने के लिए 1.5 करोड़ रुपये की मांग की गई थी। डील के अनुसार, पहली किश्त के रूप में 70 लाख रुपये दिए जाने थे।


छापेमारी का दायरा

सीबीआई ने जाल बिछाने के दौरान, एक सुपरिटेंडेंट ने प्रभा भंडारी को फोन किया और कहा, 'मैडम, पैसा मिल गया है।' इस पर डिप्टी कमिश्नर का जवाब चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा, 'ठीक है, इसे गोल्ड में बदल दो और फिर मुझे दे देना।' उन्हें लगा कि कैश की तुलना में सोने को छिपाना आसान होगा, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि सीबीआई उनकी हर बात रिकॉर्ड कर रही थी। जैसे ही रिश्वत की रकम सोने में बदलने की कोशिश हुई, सीबीआई ने दबिश देकर सभी को पकड़ लिया।


छापेमारी में मिली संपत्ति

गिरफ्तारी के तुरंत बाद, सीबीआई की टीमों ने झांसी, दिल्ली और ग्वालियर में प्रभा भंडारी और उनके सहयोगियों के ठिकानों पर छापेमारी की। इस ऑपरेशन में लाखों रुपये की नकदी और भारी मात्रा में सोने-चांदी के गहने मिले हैं। दिल्ली और अन्य पॉश इलाकों में करोड़ों की संपत्तियों के दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। लैपटॉप, मोबाइल फोन और कई डायरियां जब्त की गई हैं, जिनमें अन्य फर्मों से वसूली गई रिश्वत का हिसाब-किताब होने का संदेह है। इसलिए झांसी स्थित उनके कार्यालय और आवास को पूरी तरह सील कर दिया गया है।


गिरफ्तार साथी

प्रभा भंडारी इस पूरे मामले की मास्टरमाइंड थीं, लेकिन उनके इस काले साम्राज्य को चलाने के लिए एक पूरी टीम काम कर रही थी। सीबीआई ने इस मामले में दो सुपरिटेंडेंट्स को भी गिरफ्तार किया है, जो व्यापारियों से सीधे संपर्क में रहते थे और पैसे का कलेक्शन करते थे। इसके अलावा, एक फर्म मालिक जिसने रिश्वत दी और एक वकील जो इस डील में मध्यस्थता कर रहा था, उन्हें भी हिरासत में लिया गया है। इन सभी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत नामजद किया गया है।


भ्रष्टाचार पर प्रहार

नए साल के पहले दिन इतनी बड़ी कार्रवाई ने एक कड़ा संदेश दिया है। साल 2025 के अंत तक केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया था कि 'जीरो टॉलरेंस' की नीति केवल कागजों पर नहीं बल्कि वास्तविकता में भी लागू होगी। 1 जनवरी 2026 को हुई यह गिरफ्तारी संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में कई और रसूखदार अधिकारी जांच एजेंसियों के रडार पर हो सकते हैं।


भविष्य की संभावनाएं

प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि जीएसटी विभाग में इस तरह की शिकायतों का अंबार लगा हुआ था और प्रभा भंडारी की गिरफ्तारी से अन्य भ्रष्ट अधिकारियों में खौफ का माहौल है। नए साल के पहले दिन इस कार्रवाई की सोशल मीडिया पर सराहना हो रही है, क्योंकि लोग इसे नए साल में एक नई और साफ-सुथरी शुरुआत के रूप में देख रहे हैं।


सीबीआई अब इन सभी आरोपियों को विशेष अदालत में पेश कर रिमांड की मांग करेगी। जांच का मुख्य केंद्र अब यह पता लगाना है कि 1.5 करोड़ की इस घूसखोरी का हिस्सा ऊपर और कहां-कहां तक जाता था। क्या प्रभा भंडारी किसी और के इशारे पर काम कर रही थीं या वह खुद इस रैकेट की बॉस थीं? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे कर सकते हैं।