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सीबीआई की जांच के बावजूद भर्ती परीक्षा मामलों में सुनवाई में देरी

हाल ही में, सीबीआई ने भर्ती परीक्षा में गड़बड़ियों से जुड़े 158 मामलों की जांच पूरी कर ली है, लेकिन इन मामलों में सुनवाई अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। कई मामले तो दो दशकों से भी पुराने हैं। सीबीआई ने उच्च न्यायालयों से संपर्क कर इन लंबित मामलों को त्वरित अदालतों में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है। नए पेपर लीक रोधी कानून के तहत ये अदालतें गठित की जा रही हैं। जानें किन-किन मामलों में सुनवाई का इंतजार है और क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
 

भर्ती परीक्षा में गड़बड़ियों की जांच

(अभिषेक शुक्ला) नयी दिल्ली, दो अगस्त: भर्ती परीक्षा में संभावित गड़बड़ियों से संबंधित लगभग 158 मामलों में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच पूरी हो चुकी है, लेकिन देश के विभिन्न न्यायालयों में अब तक सुनवाई शुरू नहीं हो पाई है। इनमें से कुछ मामले तो दो दशकों से भी पुराने हैं। सूत्रों के अनुसार, सीबीआई ने इन लंबित मामलों को त्वरित अदालतों में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है और इसके लिए सभी उच्च न्यायालयों से संपर्क किया है।


त्वरित अदालतों का गठन

ये त्वरित अदालतें नए पेपर लीक रोधी कानून के तहत विभिन्न राज्यों में ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए बनाई जा रही हैं। सीबीआई ने उच्च न्यायालयों को सूचित करने का निर्णय लिया है कि वह इन मामलों की सुनवाई के लिए विशेष सरकारी वकील उपलब्ध कराएगी और सभी आवश्यक संसाधन प्रदान करेगी, ताकि सुनवाई जल्द से जल्द पूरी हो सके। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में 2000 के बाद से लगभग 25 मामले हैं जिनमें सीबीआई की जांच पूरी होने के बावजूद सुनवाई शुरू नहीं हुई है।


लंबित मामलों की सूची

इन मामलों में 2010-11 की एम्स-पीजी भर्ती परीक्षा, 2011 की दिल्ली विश्वविद्यालय मेडिकल और डेंटल प्रवेश परीक्षा, 2004 का कॉमन एडमिशन टेस्ट में गड़बड़ी, 2013 की एसएससी भर्ती और शिक्षकों की भर्ती जैसे मामले शामिल हैं। बिहार में पांच मामले लंबित हैं, जिनमें से तीन नीट-2024 के कथित पेपर लीक से संबंधित हैं। इसी प्रकार, हिमाचल प्रदेश में 2022 का कांस्टेबल भर्ती मामला उन तीन मामलों में से एक है जिनकी सुनवाई का इंतजार है।


राज्यों में लंबित मामले

सूत्रों के अनुसार, झारखंड में पांच, कर्नाटक में पांच, महाराष्ट्र में तीन (जिनमें नीट 2024 से जुड़े दो मामले शामिल हैं), राजस्थान में आठ, तमिलनाडु में 14 और पश्चिम बंगाल व उत्तर प्रदेश में 10-10 मामलों में सुनवाई का इंतजार है।