सीतारमण ने स्टालिन पर लगाया झूठा नैरेटिव फैलाने का आरोप
केंद्र और राज्य के बीच विवाद
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पर आरोप लगाया है कि वे धान बोनस के मुद्दे पर केंद्र और राज्यों के बीच विभाजन उत्पन्न करने का प्रयास कर रहे हैं। सोमवार को एक बयान में, सीतारमण ने कहा कि खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ रचनात्मक और सकारात्मक संवाद आवश्यक है। उन्होंने स्टालिन की आलोचना की, जो तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर खुद को किसानों का रक्षक बताने का प्रयास कर रहे हैं।
विवाद की शुरुआत
यह विवाद तब शुरू हुआ जब स्टालिन ने आरोप लगाया कि वित्त मंत्रालय ने तमिलनाडु के मुख्य सचिव को एक पत्र भेजा है, जिसमें राज्य की धान बोनस नीति की समीक्षा करने और उसे समाप्त करने का सुझाव दिया गया है। स्टालिन ने सीतारमण को चुनौती दी कि वे इस पत्र को सार्वजनिक करें, यह कहते हुए कि यह उनके रुख का समर्थन करता है। सीतारमण ने X पर एक पोस्ट में कहा कि खाद्य सुरक्षा के लिए सभी हितधारकों के साथ सकारात्मक जुड़ाव आवश्यक है।
आर्थिक स्थिरता की आवश्यकता
सीतारमण ने घरेलू खाद्य सुरक्षा की संवेदनशीलता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आवश्यक खाद्य पदार्थों के आयात पर निर्भरता बाहरी झटकों के लिए जोखिम पैदा करती है। उन्होंने दालों और तिलहन के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया, जो भारत के लिए आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्टालिन पर आरोप लगाया कि वे केंद्र सरकार के रचनात्मक सुझावों का समर्थन करने के बजाय इस मुद्दे को सनसनीखेज बना रहे हैं।
स्टालिन की चुनौती का जवाब
सीतारमण ने स्टालिन की चुनौती का जवाब देते हुए कहा कि पत्र पहले ही राज्य को प्राप्त हो चुका है और इसे साझा करने में कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने स्टालिन से आग्रह किया कि वे केंद्र विरोधी बयानबाजी बंद करें और तमिलनाडु के निवासियों को समझाएं कि वे दालों और तिलहनों में आत्मनिर्भरता के बजाय विदेशी हितों को प्राथमिकता क्यों दे रहे हैं।