सिद्धारमैया ने 2028 विधानसभा चुनाव न लड़ने का किया ऐलान
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने रविवार को घोषणा की कि वे 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने बताया कि उनकी उम्र और स्वास्थ्य ने इस निर्णय को प्रभावित किया है। सिद्धारमैया ने राजनीति के भ्रष्ट माहौल की भी आलोचना की और कहा कि वे सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहेंगे, लेकिन चुनाव नहीं लड़ेंगे। उनके इस फैसले के पीछे कई कारण हैं, जिनमें से एक यह है कि अब चुनाव लड़ने के लिए पैसे देने की आवश्यकता होती है। जानें इस महत्वपूर्ण निर्णय के बारे में और अधिक।
Jul 27, 2026, 16:03 IST
सिद्धारमैया का चुनावी भविष्य
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ने रविवार को यह स्पष्ट किया कि वे 2028 के विधानसभा चुनाव में भाग नहीं लेंगे। उन्होंने बताया कि राजनीति का माहौल अब भ्रष्ट हो चुका है और उनकी उम्र तथा स्वास्थ्य ने इस निर्णय को प्रभावित किया है। यह घोषणा सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद आई है, जब डीके शिवकुमार ने उनकी जगह ली। सिद्धारमैया ने अपने बयान में उम्र, स्वास्थ्य और राजनीति के बदलते स्वरूप को अपने फैसले का कारण बताया।
सिद्धारमैया ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वे भविष्य में किसी भी चुनाव में भाग नहीं लेंगे। उन्होंने लिखा, "मैं 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ूंगा। मेरी उम्र अब 79 वर्ष है और सरकार का कार्यकाल अभी डेढ़ साल बाकी है। तब तक मैं 81-82 साल का हो जाऊंगा। मेरी सेहत अब पहले जैसी नहीं रही।" उन्होंने यह भी कहा कि अब पहले जैसा उत्साह और जोश के साथ काम करना संभव नहीं है। फिर भी, वे सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहेंगे और लोगों की समस्याओं के लिए आवाज उठाते रहेंगे।
सिद्धारमैया ने कहा कि आज की राजनीति का माहौल बहुत दूषित हो गया है, इसलिए उन्होंने चुनाव न लड़ने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि वरुण निर्वाचन क्षेत्र के लोगों ने उनसे फिर से चुनाव लड़ने का आग्रह किया था, लेकिन उन्होंने अपने फैसले पर कायम रहने का निर्णय लिया है।
अपने पुराने चुनावी अनुभवों को साझा करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि पहले जब उन्होंने चुनाव लड़ा था, तो उनके निर्वाचन क्षेत्र के लोगों ने पैसे देकर उनकी जीत सुनिश्चित की थी। अब हालात बदल गए हैं, और चुनाव लड़ने के लिए लोगों को पैसे देने की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि आज की राजनीति पूरी तरह से भ्रष्ट हो चुकी है, जिससे ईमानदार राजनीति के लिए कोई स्थान नहीं बचा है। इसी कारण से उन्होंने भविष्य में चुनाव न लड़ने का निर्णय लिया है।