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सिजेरियन डिलीवरी में वृद्धि: जम्मू-कश्मीर और अन्य राज्यों की स्थिति

हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में सिजेरियन डिलीवरी के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य समस्याएं, निजी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी का बढ़ता चलन, और प्रसव पीड़ा का डर इसके प्रमुख कारण हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में सी-सेक्शन की दर काफी अधिक है। जानें इस प्रवृत्ति के पीछे के कारण और क्या यह सुरक्षित विकल्प है।
 

C-Section Delivery: एक बढ़ती हुई प्रवृत्ति

C-Section Delivery: नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में सिजेरियन प्रसव की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। इसके अलावा, भारत के कई अन्य राज्यों में भी सिजेरियन डिलीवरी के मामलों में लगातार इजाफा देखा गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस प्रवृत्ति के पीछे कई कारणों की ओर इशारा कर रहे हैं।


सिजेरियन डिलीवरी के कारण

गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य समस्याएं, निजी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी का बढ़ता चलन, प्रसव पीड़ा का भय और चिकित्सकीय सलाह जैसे कई कारक इस वृद्धि के पीछे हो सकते हैं। यह जानना आवश्यक है कि जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना जैसे राज्यों में निजी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी की दर सबसे अधिक है।


नॉर्मल डिलीवरी का डर या मेडिकल जरूरत?

इन राज्यों में क्रमशः 90%, 87.7% और 84% प्रसव सी-सेक्शन के माध्यम से हुए हैं। कई महिलाओं में नॉर्मल डिलीवरी के दर्द को लेकर चिंता देखी जा रही है। इसके अलावा, प्रसव के दौरान किसी भी प्रकार की जटिलता का डर भी सिजेरियन डिलीवरी की ओर झुकाव का कारण बन सकता है।


तेलंगाना में सिजेरियन डिलीवरी का आंकड़ा

रिपोर्टों के अनुसार, तेलंगाना में निजी अस्पतालों में 84% प्रसव सी-सेक्शन के जरिए हुए हैं। आंध्र प्रदेश में यह आंकड़ा 66% है, जबकि असम में 81.4% और ओडिशा में 76.8% प्रसव ऑपरेशन के माध्यम से हुए।


सरकारी अस्पतालों की स्थिति

सी-सेक्शन से होने वाले बच्चों की संख्या भारत में पिछले कई वर्षों से बढ़ रही है। 2005-06 में जहां केवल 8.5% बच्चे सी-सेक्शन से जन्मे थे, वहीं 2019-21 में यह आंकड़ा बढ़कर 21.5% तक पहुंच गया है। वर्तमान में, देश में एक चौथाई से अधिक जन्म (27.2%) सी-सेक्शन के जरिए हो रहे हैं। हालांकि, सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी की दर में वृद्धि धीमी रही है।


सिजेरियन डिलीवरी के बढ़ते मामले

  • प्रसव के समय होने वाला दर्द: महिलाएं अक्सर प्रसव पीड़ा के अनुभवों को सुनकर डर जाती हैं, जिससे वे सिजेरियन डिलीवरी की ओर झुकाव महसूस करती हैं।
  • बच्चे की सेहत को लेकर चिंता: गर्भ में पल रहे शिशु की सुरक्षा को लेकर परिवारों में चिंता बनी रहती है, जिससे वे सिजेरियन डिलीवरी का विकल्प चुनते हैं।
  • डिलीवरी डेट का ट्रेंड: अब लोग डिलीवरी की तारीख और समय पहले से तय करने की प्रवृत्ति अपनाने लगे हैं, जो सिजेरियन डिलीवरी के मामलों में बढ़ोतरी का कारण बन रहा है।


महत्वपूर्ण बातें

यदि मां या बच्चे के स्वास्थ्य को कोई खतरा है, तो सिजेरियन डिलीवरी एक सुरक्षित विकल्प हो सकती है। लेकिन जब नॉर्मल डिलीवरी संभव हो, तो केवल दर्द के डर या तारीख तय करने की सुविधा के कारण सी-सेक्शन का चयन करने से बचना चाहिए।