☰
×

सिख समुदाय ने 1 नवंबर की विपक्षी रैली का किया विरोध, 1984 के दंगों की याद दिलाई

दिल्ली में 1 नवंबर को होने वाली विपक्षी रैली का सिख समुदाय और 1984 के दंगा पीड़ितों ने विरोध किया है। उनका कहना है कि यह दिन सिख नरसंहार की भयावह यादों से जुड़ा है। पीड़ित परिवारों ने केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखकर रैली की अनुमति न देने की मांग की है। यदि रैली आयोजित होती है, तो सिख समुदाय इसका विरोध करने के लिए सड़कों पर उतरने की चेतावनी दे रहा है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
 

सिख समुदाय का विरोध


नई दिल्ली। 1 नवंबर 2026 को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में विपक्षी दलों के 'इंडिया' गठबंधन द्वारा आयोजित होने वाली रैली का सिख समुदाय और 1984 के दंगा पीड़ितों ने कड़ा विरोध करने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि यह दिन 1984 में हुए सिख नरसंहार की भयावह यादों से जुड़ा है। ऐसे में इस दिन कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन द्वारा रैली का आयोजन करना दंगा पीड़ितों के दुखों पर नमक छिड़कने जैसा है।


1984 के सिख-विरोधी दंगों से प्रभावित परिवारों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस रैली की अनुमति न देने की मांग की है। पीड़ितों का कहना है कि 42 साल बीत जाने के बावजूद वे उस त्रासदी और अपने प्रियजनों को खोने के दर्द को नहीं भुला पाए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 1 नवंबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में यह रैली आयोजित होती है, तो सिख समुदाय इसका विरोध करने के लिए सड़कों पर उतरेगा।


दंगा पीड़ितों और सिख प्रतिनिधियों ने कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 1 से 5 नवंबर के बीच पीड़ित परिवार गुरुद्वारों में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित कर दिवंगत परिजनों को याद करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 1984 की हिंसा के मुख्य आरोपियों को सजा दिलाने के बजाय कांग्रेस ने हमेशा उन्हें राजनीतिक संरक्षण दिया। उनका तर्क है कि कांग्रेस को राजनीतिक रैलियों के आयोजन के बजाय सिख समुदाय से अपनी ऐतिहासिक भूलों के लिए माफी मांगनी चाहिए।