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सहजन: स्वास्थ्य के लिए अद्भुत औषधि

सहजन, जिसे दक्षिण भारत में साल भर फली देने वाला पेड़ माना जाता है, स्वास्थ्य के लिए कई लाभ प्रदान करता है। इसके विभिन्न अंगों का उपयोग 300 से अधिक रोगों के उपचार में किया जाता है। जानें कैसे सहजन की पत्तियाँ, फूल, और फलियाँ विभिन्न बीमारियों में मददगार साबित होती हैं। इसके सेवन से उच्च रक्तचाप, गठिया, और अन्य रोगों में राहत मिलती है। इस लेख में सहजन के अद्भुत गुणों और इसके उपयोग के तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है।
 

सहजन के स्वास्थ्य लाभ


दक्षिण भारत में सहजन का पेड़ साल भर फलता-फूलता है, जबकि उत्तर भारत में यह केवल एक बार फली देता है। सर्दियों के बाद इसके फूलों का उपयोग सब्जी बनाने में किया जाता है, और इसके नर्म फलियों से भी स्वादिष्ट व्यंजन तैयार किए जाते हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि 100 ग्राम सहजन की शक्ति 5 गिलास दूध के बराबर होती है। इसे हर प्रकार के रोगों की औषधि माना जाता है।


आयुर्वेद में सहजन का उपयोग 300 से अधिक रोगों के उपचार में किया जाता है। इसकी फली, हरी पत्तियाँ और सूखी पत्तियाँ कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, और विटामिन-ए, सी और बी कॉम्प्लेक्स से भरपूर होती हैं।


सहजन के फूल उदर रोगों और कफ रोगों में लाभकारी होते हैं, जबकि इसकी फली वात और उदरशूल में उपयोगी है। पत्तियाँ नेत्र रोग, मोच, शियाटिका, और गठिया के लिए फायदेमंद हैं।


सहजन की जड़ दमा, जलोधर, पथरी, और प्लीहा रोगों के लिए उपयोगी है, और इसकी छाल शियाटिका, गठिया, और यकृत रोगों में लाभ देती है।


सहजन के विभिन्न अंगों के रस को मधुर, वातघ्न, रुचिकारक, वेदनाशक, और पाचक गुणों के लिए जाना जाता है।


सहजन की छाल को शहद के साथ मिलाकर पीने से वात और कफ रोगों में राहत मिलती है। इसकी पत्तियों का काढ़ा गठिया, साइटिका, पक्षाघात, और वायु विकारों में लाभकारी होता है।


मोच आने पर सहजन की पत्तियों की लुगदी को सरसों के तेल में पकाकर प्रभावित स्थान पर लगाने से लाभ मिलता है।


सहजन को 80 प्रकार के दर्द और 72 प्रकार के वायु विकारों का निवारक माना जाता है।


इसकी सब्जी खाने से पुराने गठिया, जोड़ों के दर्द, और वायु संचय में राहत मिलती है।


सहजन के ताज़े पत्तों का रस कान में डालने से दर्द में आराम मिलता है।


जड़ की छाल का काढ़ा सेंधा नमक और हींग के साथ पीने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता है।


इसके पत्तों का रस बच्चों के पेट के कीड़ों को निकालने में मददगार होता है और उल्टी-दस्त में भी उपयोगी है।


इसका रस सुबह-शाम पीने से उच्च रक्तचाप में सुधार होता है।


सहजन की पत्तियों के रस का सेवन मोटापे को कम करने में सहायक होता है।


छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़े नष्ट होते हैं और दर्द में राहत मिलती है।


कोमल पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होती है।


जड़ का काढ़ा सेंधा नमक और हींग के साथ पीने से मिर्गी के दौरे में लाभ होता है।


पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव और सूजन में राहत मिलती है।


सिरदर्द में पत्तियों को पीसकर गर्म करके सिर पर लेप करने या बीजों को घिसकर सूंघने से आराम मिलता है।