सर्वदलीय बैठक में विपक्ष का सांकेतिक वॉकआउट, किरेन रिजिजू ने दी प्रतिक्रिया
सर्वदलीय बैठक का सारांश
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि 19 जुलाई को हुई सर्वदलीय बैठक में विपक्ष का वॉकआउट केवल एक सांकेतिक कदम था, जिसे बहिष्कार नहीं माना जाना चाहिए। यह बैठक संसद के मॉनसून सत्र से पहले आयोजित की गई थी, जो 20 जुलाई से शुरू होने वाला है। रिजिजू ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इसे पूरे दिन की कार्यवाही का बहिष्कार नहीं समझा जाना चाहिए।
बैठक के दौरान विपक्ष के नेताओं ने हाल की राजनीतिक घटनाओं के विरोध में वॉकआउट किया, जिसमें 20 तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद और नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ़ इंडिया (NCPI) के साथ UBT शिवसेना के छह सांसद शामिल थे।
रिजिजू ने आगे कहा कि दलों की संख्यात्मक शक्ति पर चर्चा की गई और यह स्पष्ट किया कि राजनीतिक दलों की संख्या के आधार पर मामलों पर चर्चा की जाती है, लेकिन किसी को भी उसके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।
विपक्ष से अपील
बैठक के बाद, रिजिजू ने विपक्षी दलों से अनुरोध किया कि वे संसदीय कार्यवाही में बाधा न डालें और यह भी कहा कि सरकार विधेयकों पर गहन चर्चा चाहती है। उन्होंने विधेयकों को जल्दबाजी में पारित करने के आरोपों के खिलाफ चेतावनी दी।
छोटी पार्टियों की चिंताओं पर बात करते हुए, उन्होंने कहा कि उनके सदस्यों ने अधिक बोलने का समय मांगा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि संसद का सत्र सुचारू रूप से चलता है, तो सभी को बोलने का अवसर मिलेगा।
विपक्ष का वॉकआउट
सांकेतिक वॉकआउट में शामिल विपक्षी नेता बाद में बैठक में लौट आए। TMC नेता महुआ मोइत्रा ने कहा कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, DMK, JMM, आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वामपंथी दलों और शिवसेना (UBT) समेत पूरे विपक्ष ने बैठक से विरोध स्वरूप वॉकआउट किया।
उन्होंने यह भी बताया कि NCPI के मामले में, टेबल ऑफिस द्वारा दी गई सूची में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की सदस्य संख्या 28 दिखाई गई है, जबकि इन बागी 20 सांसदों के विलय को स्पीकर ने मंजूरी नहीं दी है।
राजनीतिक घटनाओं पर नजर
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