सर्पगंधा: औषधीय गुणों से भरपूर वनस्पति
सर्पगंधा, जिसे भारतीय स्नेक रूट भी कहा जाता है, एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है। इसका उपयोग सर्पदंश, मानसिक विकारों और अन्य बीमारियों के उपचार में किया जाता है। इसकी ताजगी पत्तियाँ सर्पदंश के लिए राहत प्रदान करती हैं, जबकि इसकी जड़ें उच्च रक्तचाप और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के लिए लाभकारी होती हैं। जानें इसके औषधीय गुण और उपयोग के बारे में विस्तार से।
Jun 12, 2026, 21:33 IST
सर्पगंधा का परिचय
➡ सर्पगन्धा (Indian Snakeroot) : सामान्य नाम
- लैटिन नाम : Rauwolifa serpentina.
- परिवार : Apocynaceae.
- हिन्दी : छोटा चाँद, धवल वरूआ, पागल बूटी
- गुजराती : अमेल पोंदि।
- मराठी : अड़कई सापसन।
➡ सर्पगंधा का सामान्य परिचय :
- सर्पगंधा एक औषधीय पौधा है, जिसका उपयोग सर्पदंश और कीड़े के काटने के उपचार में किया जाता है। इसका वानस्पतिक नाम रावोल्फिया सर्पेंटीना है।
- सर्पदंश के मामले में इसकी ताजगी पत्तियों को प्रभावित स्थान पर लगाने से राहत मिलती है। मानसिक विकारों के उपचार में भी इसका उपयोग किया जाता है।
- इसका नाम सर्पगंधा इसलिए पड़ा क्योंकि इसे सर्पों से दूर रखने के लिए उपयोग किया जाता था। प्राचीन समय में इसे विषनाशक के रूप में प्रयोग किया जाता था।
- यह विभिन्न विषों को निष्क्रिय करने में सहायक है और कोबरा जैसे विषैले सर्पों के विष को भी प्रभावहीन कर देती है।
- इसकी खेती हिमालय के तराई क्षेत्रों में की जाती है और यह 1 से 3 फुट ऊँचा होता है।
रासायनिक संगठन और औषधीय गुण
➡ रासायनिक संगठन :
- इसमें तेलीय रेजिन और सर्पेन्टाइन जैसे कई क्षार होते हैं।
- गुण : रुक्ष।
- रस : तिक्त।
- वीर्य : उष्ण।
- विपाक : कटु।
- प्रभाव : निंद्राजनन।
➡ सर्पगंधा का रोगों में प्रयोग :
- यह नींद लाने वाला, ज्वरनाशक और विष नाशक है। इसका उपयोग उच्च रक्तचाप, मानसिक विकारों और अन्य बीमारियों के उपचार में किया जाता है।
- प्रयोज्य अंग (औषधीय भाग) : मूल
- सेवन की मात्रा : 1 से 2 ग्राम
- आयुर्वेदिक दवाएँ : सर्पगंधादि चूर्ण, सर्पगन्धा योग, सर्पगन्धा वटी।
सर्पगंधा के औषधीय गुण
➡ सर्पगंधा में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के औषधीय गुण :
- यह पौधा गर्भाशय उत्तेजक और विषहर है।
- इसका उपयोग ज्वर, अतिसार, अनिद्रा, और हैजा के उपचार में किया जाता है।
- उच्च रक्तचाप के लिए इसका अर्क एक बहुमूल्य औषधि है।
- गर्भवती महिलाओं के लिए इसका अर्क प्रसव पीड़ा को कम करने में मदद करता है।
- सर्पगंधा की जड़ों का उपयोग हिस्टीरिया और मिर्गी के उपचार में किया जाता है।
- यह मानसिक तनाव और चिंता को कम करने में सहायक है।
- कब्ज जैसी बीमारियों के उपचार में भी इसका उपयोग प्रभावी है।