सरोगेसी: 35 की उम्र के बाद मां बनने के लिए जानें जरूरी बातें और मिथक
सरोगेसी का महत्व
यदि आप 35 वर्ष की आयु के बाद मातृत्व का सपना देख रही हैं, लेकिन किसी चिकित्सा कारण से गर्भधारण नहीं कर पा रही हैं, तो सरोगेसी आपके लिए एक संभावित समाधान हो सकता है। भारत में, यह तकनीक कई महिलाओं और दंपतियों के लिए एक नई आशा लेकर आई है। 47 अध्ययनों में यह पाया गया है कि अधिकांश दंपतियों को सरोगेसी से सकारात्मक परिणाम मिले हैं। हालांकि, यह जानना आवश्यक है कि कितनी महिलाएं वास्तव में सरोगेसी के माध्यम से मां बनी हैं, इस पर कोई सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरोगेसी एक जटिल चिकित्सा और कानूनी प्रक्रिया है, इसलिए इसके सभी पहलुओं को समझना आवश्यक है।
सरोगेसी की प्रक्रिया
सरोगेसी एक चिकित्सा प्रक्रिया है जिसमें इच्छुक दंपति का भ्रूण एक सरोगेट मां की कोख में स्थापित किया जाता है। यह प्रक्रिया आमतौर पर चिकित्सा जांच से शुरू होती है, जिसमें इच्छुक माता-पिता और सरोगेट मां दोनों की स्वास्थ्य जांच की जाती है। इसके बाद, IVF तकनीक का उपयोग करके भ्रूण तैयार किया जाता है। तैयार भ्रूण को सरोगेट मां के गर्भ में ट्रांसफर किया जाता है। यदि गर्भधारण सफल होता है, तो सरोगेट मां पूरी गर्भावस्था के दौरान चिकित्सकीय निगरानी में रहती है। बच्चे के जन्म के बाद, कानूनी प्रक्रिया के तहत नवजात को इच्छुक माता-पिता को सौंप दिया जाता है।
सरोगेसी के लिए आवश्यक नियम और शर्तें
भारत में सरोगेसी के लिए कुछ महत्वपूर्ण नियम हैं। इच्छुक दंपतियों को यह साबित करना होता है कि वे चिकित्सा कारणों से स्वयं बच्चे को जन्म नहीं दे सकते। इसके लिए संबंधित चिकित्सा बोर्ड से प्रमाणपत्र लेना आवश्यक है। सरोगेसी केवल रजिस्टर्ड अस्पतालों और फर्टिलिटी क्लीनिकों में ही कराई जा सकती है। इसके अलावा, भारत में कमर्शियल सरोगेसी की अनुमति नहीं है, केवल परोपकारी सरोगेसी ही कानूनी है।
सरोगेसी से जुड़े मिथक
मिथक 1: सरोगेट मां ही बच्चे की असली मां होती है।
सच्चाई: जेस्टेशनल सरोगेसी में बच्चे का आनुवंशिक संबंध इच्छुक माता-पिता से होता है।
मिथक 2: सरोगेसी केवल सेलिब्रिटीज के लिए होती है।
सच्चाई: यह किसी भी दंपति के लिए एक विकल्प हो सकता है।
मिथक 3: सरोगेसी सबसे आसान तरीका है।
सच्चाई: यह एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है।