×

सरकार पेश करेगी एनसीडीसी के अधिकार क्षेत्र का विस्तार करने वाला विधेयक

सरकार सोमवार को लोकसभा में एक महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रही है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के अधिकार क्षेत्र का विस्तार करना है। इस विधेयक के माध्यम से एनसीडीसी को सहकारी समितियों और अन्य संस्थाओं को सीधे ऋण और अनुदान देने का अधिकार मिलेगा। यह कदम सहकारी क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए उठाया जा रहा है, खासकर जब से जून 2021 में सहकारिता मंत्रालय का गठन हुआ। जानें इस विधेयक के प्रमुख बिंदुओं के बारे में।
 

एनसीडीसी के अधिकार क्षेत्र में विस्तार

नई दिल्ली, 9 अगस्त: सरकार सोमवार को लोकसभा में एक नया विधेयक पेश करने जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के अधिकार क्षेत्र को बढ़ाना है। इस विधेयक के माध्यम से एनसीडीसी को सहकारी समितियों और इस क्षेत्र में कार्यरत अन्य संस्थाओं को सीधे ऋण और अनुदान प्रदान करने का अधिकार मिलेगा। एनसीडीसी, जो सहकारिता मंत्रालय के अधीन कार्य करता है, एक वैधानिक निकाय है।


इसकी स्थापना 1963 में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 के तहत की गई थी। एनसीडीसी के प्रमुख कार्यों में कृषि उत्पादों, खाद्य पदार्थों और अन्य अधिसूचित वस्तुओं के उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन, भंडारण और आयात-निर्यात से संबंधित कार्यक्रमों की योजना बनाना, उन्हें बढ़ावा देना और वित्तीय सहायता प्रदान करना शामिल है। सरकार सोमवार को लोकसभा में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करेगी।


लोकसभा सदस्यों को वितरित विधेयक के अनुसार, इसमें मूल अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव है। इस नए विधेयक के उद्देश्यों और कारणों के विवरण के अनुसार, जून 2021 में अलग सहकारिता मंत्रालय के गठन और केंद्र सरकार द्वारा सहकारी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों के बाद एनसीडीसी की भूमिका में काफी वृद्धि हुई है। इसलिए, विधेयक में एनसीडीसी के कार्यक्षेत्र को बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है।


इसमें एनसीडीसी का दायरा केवल सहकारी समितियों के माध्यम से कार्यक्रमों की योजना बनाने और उन्हें बढ़ावा देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सहकारी विकास से जुड़े कार्यक्रमों की योजना बनाने और उन्हें बढ़ावा देने तक विस्तारित किया जाएगा। इसके अलावा, विधेयक में एनसीडीसी को सहकारी समितियों या सहकारी विकास से जुड़े किसी भी संस्थान को सीधे ऋण और अनुदान देने का अधिकार देने का प्रावधान है, बशर्ते इन धनराशियों का उपयोग सहकारी उद्देश्यों के लिए किया जाए।