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सरकार ने सिंथेटिक पनीर की बिक्री पर लगाया पूर्ण प्रतिबंध

सरकार ने भारतीय बाजारों में सिंथेटिक पनीर की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। FSSAI ने इस कदम के पीछे स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को बताया है, क्योंकि नकली पनीर असली पनीर की तरह दिखता है लेकिन पोषण में कमतर होता है। लगभग 1,000 कंपनियों को इस नीति से प्रभावित होना पड़ेगा, और उन्हें अपने मौजूदा स्टॉक को खत्म करने का समय दिया जाएगा। जानें इस फैसले के पीछे के कारण और भारत में पनीर के बढ़ते बाजार के बारे में।
 

सिंथेटिक पनीर पर सख्त कार्रवाई

सरकार ने सिंथेटिक पनीर की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया: भारतीय बाजारों में सिंथेटिक पनीर की बिक्री को रोकने के लिए सरकार ने ठोस कदम उठाने का निर्णय लिया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने यह तय किया है कि कम पोषण वाले और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिंथेटिक पनीर को बाजार से पूरी तरह हटा दिया जाएगा।


सिंथेटिक पनीर पर सरकार सख्त, FSSAI ने लगाया बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध, रद्द होगे 1,000 कंपनियों के लाइसेंस


FSSAI के दो अधिकारियों ने बताया कि, नकली पनीर की बिक्री को रोकने के लिए बनाई गई एक उच्च स्तरीय समिति ने इस प्रस्ताव को अक्टूबर 2025 में अंतिम रूप दिया था, जिसे मार्च 2026 में हुई बैठक में स्वीकृति मिली है।


सिंथेटिक पनीर की बिक्री पर रोक की योजना

अधिकारियों के अनुसार, समिति का मानना है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा डेयरी उत्पादक देश है, फिर भी बाजार में बड़ी मात्रा में सस्ता सिंथेटिक पनीर उपलब्ध है। यह पनीर असली पनीर की तरह दिखता है और स्वाद में भी मिलता-जुलता होता है, जिससे ग्राहकों के लिए असली और नकली पनीर में अंतर करना मुश्किल हो जाता है। इस कारण वे गलती से नकली पनीर का सेवन कर लेते हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।


1,000 कंपनियों का सिंथेटिक पनीर उत्पादन

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश में लगभग 1,000 कंपनियों के पास सिंथेटिक पनीर बनाने का लाइसेंस है। लेकिन अब FSSAI इसे धीरे-धीरे बाजार से हटाने की योजना बना रही है। वर्तमान में, सिंथेटिक पनीर की बिक्री पर पूरी तरह से रोक नहीं है। नई नीति के तहत नए लाइसेंस जारी करने पर रोक लगाई जाएगी। इसके अलावा, जिन कंपनियों के पास लाइसेंस है, उन्हें मौजूदा स्टॉक खत्म करने और उत्पादन बंद करने के लिए समय दिया जाएगा।


निर्णय का कारण

अधिकारियों ने बताया कि हाल के समय में बाजार में 'सिंथेटिक पनीर' का चलन तेजी से बढ़ा है। यह पनीर का एक सस्ता विकल्प है, जिसे ताजे दूध की जगह पाम ऑयल, मिल्क पाउडर, स्टार्च और इमल्सीफायर्स से बनाया जाता है। सिंथेटिक पनीर दिखने में असली पनीर की तरह होता है, लेकिन इसकी गुणवत्ता और पोषण असली दूध से बने पनीर के मुकाबले काफी कम होती है।


भारत में पनीर का बढ़ता बाजार

भारत में पनीर को प्रोटीन का एक प्रमुख स्रोत माना जाता है, खासकर उत्तर भारतीय राज्यों में। यही कारण है कि भारत में पनीर का बाजार लगातार बढ़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार, देश में पनीर का बाजार 10.8 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। अनुमान है कि 2033 तक यह बाजार 22.1 अरब डॉलर के आसपास पहुंच सकता है, जिसकी वार्षिक वृद्धि दर 8.7% रहने की संभावना है।



FSSAI के अनुसार, असली ब्रांडेड पनीर की कीमत लगभग 450 रुपये प्रति किलो है, जबकि खुले में बिकने वाले सिंथेटिक पनीर 250 से 300 रुपये प्रति किलो की दर पर मिलते हैं। इस कारण ग्राहक आसानी से सिंथेटिक पनीर की ओर आकर्षित होते हैं। इसके अलावा, सिंथेटिक पनीर में प्रोटीन की मात्रा कम और फैट अधिक होता है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।