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सरकार ने लॉन्च किया 20 रुपए सस्ता E85 ईंधन, फ्लेक्सफ्यूल वाहनों के लिए विशेष

भारत सरकार ने फ्लेक्सफ्यूल वाहनों के लिए E85 नामक नया ईंधन लॉन्च किया है, जो सामान्य पेट्रोल की तुलना में 20 रुपए प्रति लीटर सस्ता है। यह ईंधन विशेष रूप से फ्लेक्सफ्यूल इंजन वाले वाहनों के लिए है और इसके माध्यम से पर्यावरण में सुधार और विदेशी मुद्रा की बचत की उम्मीद की जा रही है। जानें इस ईंधन की विशेषताएँ और इसके संभावित लाभ।
 

सरकार का नया ईंधन विकल्प

सरकार ने फ्लेक्सफ्यूल वाहनों के लिए E85 नामक हाईएथनॉल मिश्रण वाले ईंधन को सामान्य पेट्रोल की तुलना में 20 रुपए प्रति लीटर की छूट पर पेश किया है। यह ईंधन प्रारंभ में कुछ चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध होगा और इसका उपयोग केवल फ्लेक्सफ्यूल इंजन वाले वाहनों में किया जा सकेगा। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर इंडियन ऑयल के एक पेट्रोल पंप पर इस ईंधन का अनावरण किया। इस ईंधन की बिक्री देशभर के 48 सार्वजनिक क्षेत्र के पेट्रोल पंपों पर की जाएगी। मंत्री ने बताया कि सरकार की योजना दिसंबर 2026 तक इसकी उपलब्धता को 500 पेट्रोल पंपों तक और दिसंबर 2027 तक लगभग 5,000 पेट्रोल पंपों तक बढ़ाने की है.


E85 ईंधन की विशेषताएँ

E85 ईंधन में 80-85 प्रतिशत एथनॉल और 14-19 प्रतिशत पेट्रोल होता है। इसका उपयोग केवल फ्लेक्सफ्यूल वाहनों में किया जा सकता है, जो विभिन्न मिश्रण वाले ईंधनों पर चलने में सक्षम होते हैं। इसमें एक एडवांस इंजन कंट्रोल यूनिट होती है, जो पेट्रोल में एथनॉल की मात्रा के अनुसार अपने आप अनुकूलन कर सकती है। पुरी ने कहा कि E85 के बुनियादी ढांचे के विस्तार से भारत में एथनॉल के समग्र मिश्रण स्तर को 2030-31 तक लगभग 26 प्रतिशत तक बढ़ाने में मदद मिलेगी।


बचत और पर्यावरण पर प्रभाव

मंत्री ने बताया कि भारत ने पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की दर को 2014 के 1.53 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया है, और यह लक्ष्य समय से पांच साल पहले हासिल किया गया है। इस कार्यक्रम से विदेशी मुद्रा में 1.84 लाख करोड़ रुपए से अधिक की बचत हुई है और कच्चे तेल का आयात लगभग 30.2 लाख मीट्रिक टन कम हुआ है। मंत्रालय के अनुमानों के अनुसार, E85 पर चलने वाली फ्लेक्सफ्यूल गाड़ियां पारंपरिक पेट्रोल गाड़ियों की तुलना में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को लगभग 61 प्रतिशत तक कम कर सकती हैं।


भविष्य की संभावनाएँ

पुरी ने कहा कि यदि भारत में बिकने वाले सभी नए दोपहिया और पैसेंजर वाहनों में से आधे फ्लेक्सफ्यूल टेक्नोलॉजी पर शिफ्ट हो जाएं, तो इथेनॉल की सालाना मांग 312 करोड़ लीटर से अधिक बढ़ सकती है। इससे किसानों को लगभग 12,403 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय हो सकती है। इस बदलाव से सालाना लगभग 15,151 करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में 66.4 लाख मीट्रिक टन की कमी आ सकती है।


राज्यों से सहयोग की अपील

उन्होंने इथेनॉल मिश्रित ईंधन के बारे में चिंताओं को दूर करने का प्रयास किया और कहा कि E85 विशेष रूप से फ्लेक्सफ्यूल गाड़ियों के लिए है। मंत्री ने राज्य सरकारों से अपील की कि वे E85 ईंधन और फ्लेक्सफ्यूल गाड़ियों के लिए अनुकूल टैक्स नीतियों के माध्यम से इस बदलाव में सहयोग करें। उन्होंने इथेनॉल को भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।