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सरकार ने फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए E100 ईंधन को मंजूरी दी

केंद्र सरकार ने फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए E100 ईंधन को मंजूरी दी है, जिससे पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने और वैकल्पिक ईंधन के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। नए नियमों के तहत, केवल विशेष रूप से तैयार किए गए वाहन ही इस ईंधन का उपयोग कर सकेंगे। यह कदम भारत में ईंधन की विविधता को बढ़ाने और पर्यावरण के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
 

फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए नई दिशा


नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में संशोधन करते हुए फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए E85 के साथ E100 ईंधन को भी वैकल्पिक विकल्प के रूप में शामिल किया है। इस बदलाव के बाद, निर्धारित मानकों के अनुसार तैयार और प्रमाणित वाहन अब E100 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन का उपयोग कर सकेंगे।


सरकार का यह कदम पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता को कम करने और वैकल्पिक ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहित करने के प्रयासों का हिस्सा है।


मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना 23 अक्टूबर को जारी की गई थी और इसे 26 अक्टूबर को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित किया गया। यह अधिसूचना तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। इससे पहले 27 अप्रैल को इन नियमों का मसौदा जारी किया गया था। उस समय संबंधित पक्षों से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे। प्राप्त प्रतिक्रियाओं की समीक्षा के बाद मंत्रालय ने संशोधित नियमों को अंतिम रूप दिया है।


E100 ऐसे ईंधन को कहा जाता है, जिसमें लगभग पूरी मात्रा इथेनॉल की होती है। तकनीकी रूप से इसमें थोड़ी मात्रा में पानी मौजूद हो सकता है, जो दहन प्रक्रिया में सहायक होता है। वहीं, E85 ईंधन में 85 प्रतिशत इथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है। फ्लेक्स-फ्यूल वाहन इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि वे शुद्ध पेट्रोल से लेकर इथेनॉल और पेट्रोल के अलग-अलग अनुपात वाले मिश्रण पर चल सकें।


हालांकि, सरकार की नई मंजूरी का लाभ सभी पेट्रोल वाहनों को स्वतः नहीं मिलेगा। केवल वे वाहन E85 और E100 का उपयोग कर सकेंगे, जिन्हें उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के लिए तैयार किया गया है और आवश्यक प्रमाणन प्राप्त है। देश में सामान्य तौर पर इस्तेमाल होने वाले E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। ऐसे ईंधन के लिए बने पारंपरिक पेट्रोल वाहन उचित तकनीकी बदलाव और प्रमाणन के बिना सीधे E85 या E100 पर नहीं चलाए जा सकते।


भारत में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को लेकर वाहन निर्माता कंपनियों की दिलचस्पी बढ़ रही है। कई प्रमुख कंपनियां भारतीय बाजार में E100 के अनुकूल वाहन पेश करने की तैयारी कर रही हैं। नए नियमों से वाहन निर्माताओं को ऐसे मॉडल विकसित करने और उन्हें निर्धारित मानकों के तहत बाजार में उतारने के लिए स्पष्ट नियामकीय आधार मिलेगा। इसके साथ ही, सरकार को उम्मीद है कि वैकल्पिक ईंधन का उपयोग बढ़ने से कच्चे तेल के आयात पर देश की निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।


हालांकि, E100 या उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन को अपनाने के लिए वाहनों में महत्वपूर्ण तकनीकी बदलाव करना आवश्यक है। इथेनॉल के संक्षारक गुणों को ध्यान में रखते हुए ईंधन प्रणाली के कई हिस्सों, जैसे सील, ईंधन पाइप और इंजेक्टर को उपयुक्त सामग्री से तैयार करना पड़ता है। इसके अलावा, इंजन के प्रबंधन तंत्र को भी इथेनॉल की अलग दहन विशेषताओं के अनुरूप समायोजित करना होता है। इन बदलावों के बिना सामान्य पेट्रोल इंजन में उच्च इथेनॉल मिश्रण का इस्तेमाल नुकसान पहुंचा सकता है।


E100 ईंधन के इस्तेमाल से जुड़ी एक अन्य चुनौती इसकी ऊर्जा क्षमता है। प्रति लीटर इथेनॉल से मिलने वाली ऊर्जा पेट्रोल की तुलना में लगभग एक तिहाई कम होती है। इसका अर्थ है कि समान दूरी तय करने के लिए वाहन को अधिक ईंधन की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसी स्थिति में वाहन में बड़े ईंधन टैंक की जरूरत हो सकती है या चालक को अपेक्षाकृत कम अंतराल पर ईंधन भरवाना पड़ सकता है। इसलिए फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के विकास में इंजन की दक्षता, ईंधन खपत और वाहन के डिजाइन को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण होगा।


दुनिया में ब्राजील फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के सबसे विकसित बाजारों में शामिल है। वहां वर्ष 2003 से इस तरह के वाहनों का व्यापक कार्यक्रम संचालित हो रहा है। गन्ने से तैयार इथेनॉल वहां वाहन ईंधन के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में इस्तेमाल किया जाता है और बड़ी संख्या में वाहन इथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चलते हैं। हालांकि, वहां उपभोक्ताओं के पास कम इथेनॉल मात्रा वाले पेट्रोल का विकल्प भी उपलब्ध रहता है।


भारत में केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में किया गया यह संशोधन फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नियामकीय बदलाव है। हालांकि, इसके वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेंगे कि वाहन निर्माता कितनी तेजी से उपयुक्त मॉडल बाजार में उतारते हैं और E100 ईंधन की उपलब्धता तथा वितरण व्यवस्था किस तरह विकसित होती है। तकनीकी जरूरतों और ईंधन की कम ऊर्जा क्षमता को देखते हुए वाहन खरीदने वालों के लिए यह समझना जरूरी होगा कि E100 का इस्तेमाल केवल निर्धारित मानकों के अनुरूप तैयार वाहनों में ही किया जाना चाहिए।