सरकार का नया नियम: खाने के तेल के पैक साइज में बदलाव
सरकार का उपभोक्ता हित में कदम
नई दिल्ली: उपभोक्ताओं के लाभ के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह कदम उपभोक्ता पारदर्शिता को बढ़ावा देने और निष्पक्ष व्यापार को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने 'लीगल मेट्रोलॉजी फ्रेमवर्क' के तहत खाने के तेल और वसा की मात्रा के साथ मानक पैक साइज निर्धारित करने के लिए 29 दिसंबर 2023 को मानक संचालन प्रक्रिया (SoP) में संशोधन किया है.
बातचीत के बाद लिया गया निर्णय
यह निर्णय देश के खाने के तेल क्षेत्र का लगभग 90 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख उद्योग संघों के साथ व्यापक चर्चा के बाद किया गया है। इसका उद्देश्य बाजार में विभिन्न पैक साइज की बढ़ती संख्या से उत्पन्न समस्याओं को हल करना है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए कीमतों की तुलना करना और सही जानकारी के साथ खरीदारी करना कठिन हो जाता है.
खाने के तेल के लिए मानक पैक साइज
प्रमुख खाने के तेलों और मिश्रित खाने के तेलों के लिए मानक पैक साइज निर्धारित किए गए हैं। इससे उपभोक्ता विभिन्न ब्रांडों की कीमतों की आसानी से तुलना कर सकेंगे और सही मूल्य का आकलन कर सकेंगे। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए वॉल्यूम और उसके बराबर वजन की जानकारी देना अनिवार्य होगा. ये नियम देश में निर्मित और आयातित दोनों प्रकार के खाने के तेलों पर लागू होंगे.
मानक पैक साइज की सूची
संशोधित SoP में निम्नलिखित मानक पैक साइज निर्धारित किए गए हैं: 200 ml/g, 500 ml/g, 1 litre/kg, 2 litre/kg, 3 litre/kg, 4 litre/kg, 5 litre/kg, 15 litre/kg, और 20 litre/kg.
उपभोक्ताओं को लाभ
ये मानक साइज उपभोक्ताओं को विभिन्न ब्रांडों की कीमतों की तुलना करने और सही जानकारी के साथ खरीदारी करने में मदद करेंगे. 200 ml या 200 ग्राम से कम के पैक मानकीकरण के दायरे से बाहर रहेंगे, जिससे उपभोक्ताओं के लिए सस्ते छोटे पैक उपलब्ध रहेंगे.
नए नियमों का प्रभाव
यदि खाने के तेल की मात्रा लीटर या मिलीलीटर में दर्शाई गई है, तो पैक पर उसके बराबर वजन का भी स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। यह आवश्यकता 'लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) रूल्स, 2011' के अनुसार पूरी की जाएगी. इससे ग्राहकों को विभिन्न ब्रांड के उत्पादों की तुलना करने और खरीदारी के बारे में बेहतर निर्णय लेने में आसानी होगी.
उद्योग का स्वागत
इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IVPA) के अध्यक्ष सुधाकर देसाई ने कहा, 'सरकार के इस कदम से रिटेल शेल्फ पर व्यवस्था में सुधार होगा। सभी के लिए समानता का माहौल बनेगा।' उन्होंने कहा कि यह निर्णय लंबे समय से चल रहे मुद्दे को सुलझाने में मदद करेगा.