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सरकार का इथेनॉल मिश्रण पर नया बयान: 20% इथेनॉल का प्रयोग जारी

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जानकारी दी है कि पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाने का कार्यक्रम अभी भी प्रयोगात्मक चरण में है। इस नीति को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच, सरकार ने आश्वासन दिया है कि E20 पेट्रोल से गाड़ियों को कोई नुकसान नहीं होगा। अटॉर्नी जनरल ने बताया कि अगले वर्ष तक इस प्रयोग के परिणाम सामने आएंगे। इसके अलावा, भारत ने पहले ही 20% इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया है और 2030 तक इसे 30% तक बढ़ाने की योजना है। जानें इस विषय पर और क्या कहा गया।
 

सरकार का इथेनॉल मिश्रण पर स्पष्टीकरण

सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में जानकारी दी कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का कार्यक्रम अभी भी एक प्रयोगात्मक चरण में है, और इसके प्रभाव अगले वर्ष तक स्पष्ट होंगे। यह बयान उस समय आया है जब इस नीति को लेकर व्यापक चर्चा और चिंताएं उठ रही हैं; कई लोगों को आशंका है कि इथेनॉल की अधिक मात्रा पुरानी गाड़ियों को नुकसान पहुंचा सकती है और ईंधन की दक्षता को भी प्रभावित कर सकती है। हालांकि, सरकार ने इन चिंताओं को दूर करने का प्रयास करते हुए कहा है कि E20 पेट्रोल से गाड़ियों के मैकेनिकल हिस्सों को नुकसान पहुंचने का कोई ठोस प्रमाण नहीं है, और यह नीति भारत की ऊर्जा सुरक्षा, किसानों और पर्यावरण के लिए लाभकारी साबित होगी。


अटॉर्नी जनरल का बयान

इस मामले में अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने अपनी बात रखी। वे सरकारी कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) की याचिका पर बहस कर रहे थे, जिसमें 2025-26 सप्लाई वर्ष के लिए इथेनॉल आवंटन से संबंधित कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। हाई कोर्ट ने 23 जून को आदेश दिया था कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) BPCL, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) को टेंडर को अंतिम रूप देने से पहले, इथेनॉल आवंटन बढ़ाने की मांग करने वाली एक डिस्टिलरी की अर्ज़ी पर विचार करना होगा। BPCL ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि हाई कोर्ट का आदेश सरकार के 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य पर प्रभाव डाल सकता है। अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को बताया कि सरकार इस प्रक्रिया पर प्रयोग कर रही है और अगले वर्ष तक इसके परिणाम सामने आएंगे।


सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई

सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि BPCL ने कर्नाटक हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच में अपील क्यों नहीं की। इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि इथेनॉल सप्लाई के कॉन्ट्रैक्ट पहले से अक्टूबर 2025 के लिए तय हो चुके हैं और इसी तरह की याचिकाएं कई हाई कोर्ट में लंबित हैं। उन्होंने कहा कि इसका असर राष्ट्रीय नीति पर पड़ेगा। वेंकटरमणी ने ट्रांसफर याचिका दायर करने की अनुमति मांगी, यह कहते हुए कि इस मामले पर अक्टूबर से पहले निर्णय होना आवश्यक है, क्योंकि तब इथेनॉल सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट का नवीनीकरण होगा। सुनवाई के कुछ समय बाद, अटॉर्नी जनरल ने स्पष्ट किया कि 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण एक नीति से संबंधित निर्णय है, जिसमें बदलाव की संभावना नहीं है।


इथेनॉल मिश्रण का भविष्य

उन्होंने आगे कहा कि मांग और अन्य कारणों के आधार पर कंपनियों को मिलने वाले इथेनॉल की मात्रा में बदलाव हो सकता है। भारत ने पिछले वर्ष पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया, जो निर्धारित समय से पांच वर्ष पहले था। तेल विपणन कंपनियों ने 1 अप्रैल से देशभर में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की आपूर्ति शुरू कर दी है। सरकार ने 2030 तक पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा को 30 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। यह सुनवाई केंद्रीय तेल मंत्रालय के उस बयान के एक सप्ताह से भी कम समय बाद हुई, जिसमें मंत्रालय ने इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को सुरक्षित और आर्थिक रूप से लाभकारी बताया था। मंत्रालय ने यह भी कहा कि E20 ईंधन के उपयोग से गाड़ी के बीमा कवरेज पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। 24 जून को जारी एक बयान में मंत्रालय ने कहा कि E20 ईंधन से बीमा पॉलिसी अमान्य होने के दावों की जांच की गई और वे गलत पाए गए।