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सनावदिया में रक्षाबंधन पर पर्यावरण संरक्षण की अनोखी पहल

सनावदिया में रक्षाबंधन के अवसर पर एक अनोखी पहल देखने को मिली, जहां 50 पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। पद्मश्री डॉ. जनक पलटा मगिलिगन ने इस परंपरा को 1986 से जारी रखा है। इस वर्ष भी भाई-बहनों ने मिलकर पौधारोपण किया और प्रकृति की रक्षा का संकल्प लिया। जानें इस विशेष कार्यक्रम के बारे में और कैसे यह पहल भाई-बहन के रिश्ते को और मजबूत बनाती है।
 

रक्षाबंधन का पर्व और पर्यावरण संरक्षण




सनावदिया: रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के रिश्ते की मजबूती का प्रतीक माना जाता है, लेकिन सनावदिया में इसे पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर एक नई मिसाल पेश की गई। पद्मश्री डॉ. जनक पलटा मगिलिगन ने अपने 41वें रक्षाबंधन को 50 पौधे लगाकर मनाया। पिछले 40 वर्षों से यह अनूठी परंपरा इस वर्ष भी श्रद्धा और उत्साह के साथ जारी रही।


जिम्मी और जनक मगिलिगन फाउंडेशन फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में, जनक दीदी ने 28 अगस्त 2026 को अपने घर 'गिरिदर्शन' के पीछे दुतनी टेकरी पर अपने भाई राजेंद्र ओचानी और अन्य पर्यावरण प्रेमियों के साथ मिलकर सामूहिक पौधारोपण किया। सभी ने मिलकर 50 पौधे लगाए और उनके संरक्षण का संकल्प लिया।



1986 से चली आ रही अनोखी परंपरा

जनक दीदी ने बताया कि रक्षाबंधन पर पौधे लगाने की यह परंपरा 1986 में शुरू हुई थी। उन्होंने बताया कि ट्रेन में एक मुलाकात के बाद उनका जुड़ाव आदिवासी लड़कियों को प्रशिक्षण देने के कार्य से हुआ। इसी दौरान राजेंद्र ओचानी और उनकी पत्नी ज्योति से उनका आत्मीय संबंध बना।


पहली राखी पर जब भाई ने पूछा कि उन्हें क्या उपहार चाहिए, तो उन्होंने सहजता से अपनी पसंद बताई। जब ज्योति भाभी ने पूछा कि उन्हें साड़ी पसंद है या सलवार सूट, तो जनक दीदी ने कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा पौधा पसंद है। तब से रक्षाबंधन पर पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने की परंपरा जारी है।



प्रकृति की रक्षा का संदेश

जनक दीदी की इस पहल का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि रक्षाबंधन के पर्व को पर्यावरण संरक्षण के संदेश से जोड़ना भी है। उनका मानना है कि जिस तरह भाई-बहन एक-दूसरे की रक्षा का संकल्प लेते हैं, उसी तरह इंसान को प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।


41वें रक्षाबंधन पर लगाए गए पौधों के माध्यम से उपस्थित लोगों ने हरियाली बढ़ाने, पेड़ों की देखभाल करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर पर्यावरण तैयार करने का संदेश दिया।


कार्यक्रम की शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध हृदय विशेषज्ञ डॉ. भरत रावत के शंखनाद से हुई। इसके बाद जनक दीदी, डॉ. प्रकाश कौशल, डॉ. प्रिया शर्मा और बच्चों ने बहाई प्रार्थना में भाग लिया। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया।


डॉ. भरत रावत और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरजा पौराणिक ने पौधारोपण कर पर्यावरण बचाने का आह्वान किया। इसके बाद सभी भाई-बहनों और पर्यावरण प्रेमियों ने मिलकर 50 पौधे रोपे।



भाई-बहनों की भागीदारी

इस अनोखे रक्षाबंधन कार्यक्रम में केवल सनावदिया ही नहीं, बल्कि लखनऊ, दिल्ली, ग्वालियर, इंदौर और आसपास के गांवों से भी भाई-बहन शामिल हुए। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों, चिकित्सकों, पर्यावरण प्रेमियों और ग्रामीणों ने भाग लिया।


इस अवसर पर फाउंडेशन ट्रस्टी अनुराधा दुबे, प्रो. आशीष दुबे, गांव के उपसरपंच प्रकाश रावलिया, चार्टर्ड अकाउंटेंट लक्ष्मण खंडेलवाल, समाजसेवी विद्यावती रावत, एक्रोपोलिस के डायरेक्टर डॉ. अनुराग तिवारी, उनकी बहन अंजु और सत्येंद्र, उनके बेटे अद्वै, सोलर इंजीनियर सुसुमिता भट्टाचार्य, आर्किटेक्ट अंगद कसलीवाल, प्रणीत और सृष्टि सहित कई लोग मौजूद रहे।


इसके अलावा इंद्र भंडारी परिवार, भारत भंडारी, महेंद्र धाकड़, रवि गुप्ता, हेमंत और केशव, मनोज नागर एवं उनके बच्चे, सस्टेनेबल फार्मर भारत सिंह, शैलेंद्र और उनके मित्रों ने भी पौधारोपण में सहभागिता की।


पौधों की देखभाल पर जोर

कार्यक्रम में केवल पौधे लगाने तक सीमित न रहने, बल्कि उनकी नियमित देखभाल करने पर भी जोर दिया गया। पौधारोपण और उसके बाद पौधों की देखभाल में वन विभाग इंदौर और जैविक सेतु का सहयोग रहा। आयोजकों ने कहा कि पौधारोपण तभी सार्थक होगा, जब लगाए गए पौधों को सुरक्षित रखते हुए उन्हें पेड़ बनने तक उनकी उचित देखभाल की जाए।


पर्यावरण संरक्षण की मिसाल

रक्षाबंधन के मौके पर जनक दीदी द्वारा पिछले चार दशकों से निभाई जा रही यह परंपरा अब पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाली पहल बन चुकी है। जहां एक ओर यह पर्व भाई-बहन के रिश्ते की मजबूती का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर पौधारोपण के जरिए प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी सामने आता है।


41वें रक्षाबंधन पर 50 पौधे लगाकर जनक दीदी और उनके साथियों ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि त्योहारों को सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों से जोड़कर उन्हें और भी सार्थक बनाया जा सकता है।


कार्यक्रम के अंत में जनक दीदी ने पौधारोपण में शामिल सभी भाई-बहनों, पर्यावरण प्रेमियों, सहयोगी संस्थाओं और उपस्थित लोगों का हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने भविष्य में भी पर्यावरण संरक्षण के इस संकल्प को जारी रखने की बात कही।